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Contractual Nurses Regularized: 221 स्वास्थ्यकर्मियों को मिला स्थायी रोजगार का तोहफा

Contractual Nurses Regularized।मेघालय की कोनराड संगमा सरकार ने नए साल में राज्य के स्वास्थ्यकर्मियों और न्यायपालिका की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए महत्वपूर्ण निर्णयों की झड़ी लगा दी है।

राज्य मंत्रिमंडल की हालिया बैठक में वर्षों से संविदा पर कार्यरत नर्सों और पैरामेडिक कर्मचारियों को नियमित करने के साथ-साथ न्यायिक सेवा नियमों में बड़े बदलावों को मंजूरी दी गई है।

मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने कैबिनेट बैठक के बाद जानकारी दी कि वर्ष 2008 से 2012 के बीच नियुक्त किए गए 221 संविदा नर्सों और पैरामेडिक कर्मियों की सेवाओं को अब नियमित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इन नियुक्तियों को लेकर लंबे समय से संशय बना हुआ था और पहले इन्हें दोबारा भर्ती प्रक्रिया से गुजारने का प्रस्ताव था।

हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के दस्तावेजों की गहन जांच और कर्मचारियों से परामर्श के बाद यह पाया गया कि उनकी प्रारंभिक भर्ती निर्धारित सरकारी नियमों के तहत ही हुई थी। इस फैसले से अब इन स्वास्थ्यकर्मियों के भविष्य की अनिश्चितता खत्म होगी और इन पदों पर नई भर्ती की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।

राज्य सरकार ने न्यायपालिका को अधिक समावेशी और स्थानीय बनाने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया है। मंत्रिमंडल ने मेघालय न्यायिक सेवा नियम 2006 और मेघालय उच्चतर न्यायिक सेवा नियम 2015 में संशोधन को हरी झंडी दे दी है।

अब मेघालय न्यायिक सेवा के अभ्यर्थियों के लिए राज्य की स्थानीय भाषाओं यानी ‘खासी’ या ‘गारो’ का ज्ञान होना अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बदलाव न्यायपालिका की सिफारिशों के आधार पर किया गया है ताकि कानूनी प्रक्रिया को स्थानीय नागरिकों के लिए अधिक सुलभ बनाया जा सके।

स्वास्थ्य क्षेत्र में एक और अहम उपलब्धि के रूप में ‘मेघालय मानसिक स्वास्थ्य सेवा नियमों’ को मंजूरी दी गई है। यह नए नियम मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों और पुनर्वास केंद्रों के लिए एक मजबूत नियामक ढांचा तैयार करेंगे।

वहीं, जल जीवन मिशन के तहत मिलने वाले 700 करोड़ रुपये के फंड में हो रही देरी पर मुख्यमंत्री ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने केंद्रीय मंत्रिमंडल के निर्देशानुसार पूरे देश में एक राष्ट्रव्यापी ऑडिट अनिवार्य किया है।

जब तक यह ऑडिट प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक केंद्र सरकार ने मेघालय सहित सभी राज्यों का भुगतान रोक रखा है। ऑडिट पूरा होते ही फंड जारी होने की उम्मीद है।

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