LIVE UPDATE
india

chandra grahan- 3 मार्च को साल का पहला चंद्र ग्रहण: होलिका दहन के दिन दिखेगा ब्लड मून, सूतक काल से लेकर बचाव के नियम तक सब कुछ यहां जानें

ग्रहण के दौरान सबसे महत्वपूर्ण सावधानी यह है कि भगवान की मूर्तियों और मंदिरों का स्पर्श न किया जाए। ग्रहण शुरू होने से पहले ही घर के मंदिर को लाल या पीले रंग के कपड़े से ढक देना चाहिए। इसके अलावा, तुलसी, पीपल और बरगद जैसे पवित्र वृक्षों को छूना भी वर्जित माना गया है। मान्यताओं के अनुसार, इस समय चाकू, सुई और कैंची जैसी नुकीली वस्तुओं का प्रयोग करने से बचना चाहिए और नाखून या बाल काटने जैसे कार्यों से भी दूरी बनानी चाहिए।

chandra grahan/दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को लगने जा रहा है। यह एक खगोलीय घटना मात्र नहीं है, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण ‘पूर्ण चंद्र ग्रहण’ है, जिसे दुनिया भर में ‘ब्लड मून’ के नाम से भी जाना जाता है।

इस बार का ग्रहण बेहद खास और दुर्लभ संयोग लेकर आ रहा है, क्योंकि यह फाल्गुन पूर्णिमा के दिन पड़ रहा है, जिस दिन पूरा देश होलिका दहन का पावन पर्व मनाएगा। चूंकि यह चंद्र ग्रहण भारत में साफतौर पर दिखाई देगा, इसलिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसका सूतक काल और नियम देशवासियों के लिए विशेष प्रभावी रहेंगे।

धार्मिक और ज्योतिषीय जानकारों का मानना है कि ग्रहण काल के दौरान वायुमंडल में नकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ जाता है, इसलिए इस समय कुछ खास नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है।

ग्रहण के दौरान सबसे महत्वपूर्ण सावधानी यह है कि भगवान की मूर्तियों और मंदिरों का स्पर्श न किया जाए। ग्रहण शुरू होने से पहले ही घर के मंदिर को लाल या पीले रंग के कपड़े से ढक देना चाहिए। इसके अलावा, तुलसी, पीपल और बरगद जैसे पवित्र वृक्षों को छूना भी वर्जित माना गया है। मान्यताओं के अनुसार, इस समय चाकू, सुई और कैंची जैसी नुकीली वस्तुओं का प्रयोग करने से बचना चाहिए और नाखून या बाल काटने जैसे कार्यों से भी दूरी बनानी चाहिए।

विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं के लिए इस दौरान कड़े नियम बताए गए हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण काल में गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए और किसी भी नुकीली वस्तु का स्पर्श नहीं करना चाहिए, ताकि होने वाले शिशु पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। साथ ही, इस समय मन में नकारात्मक विचार लाने या किसी से विवाद करने से बचना चाहिए, क्योंकि ग्रहण के समय की गई मानसिक स्थिति का असर लंबे समय तक रहता है। दांपत्य संबंधों के लिए भी यह समय शुभ नहीं माना जाता है।

एक ओर जहां कुछ कार्यों की मनाही है, वहीं ग्रहण काल में किए गए जप-तप का फल कई गुना बढ़ जाता है।

इस दौरान शिव जी के ‘महामृत्युंजय मंत्र’ और चंद्रमा के विशेष मंत्र “ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः” का जाप करना अत्यंत लाभकारी और मानसिक शांति प्रदान करने वाला माना गया है। ग्रहण के समय धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना और अपने इष्ट देव का स्मरण करना सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहण के समय दान का विशेष महत्व है। यदि आप चंद्र दोष से मुक्ति चाहते हैं, तो ग्रहण के बाद चावल, दूध, घी, सफेद वस्त्र और चांदी का दान करना शुभ फलदायी होता है। इससे पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।

जैसे ही ग्रहण समाप्त हो, तुरंत स्नान करना चाहिए ताकि शरीर की अशुद्धि दूर हो सके। स्नान के पश्चात पूरे घर और मंदिर में गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए ताकि वातावरण शुद्ध हो जाए। ग्रहण के बाद श्राद्ध, हवन और तर्पण करना भी पूर्वजों की कृपा पाने का उत्तम मार्ग बताया गया है। 

Back to top button
close