CG News -कांकेर: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से प्रशासनिक गलियारे को चौंकाने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। यहाँ दुर्गुकोंदल विकासखंड शिक्षा कार्यालय में पदस्थ सहायक खंड शिक्षा अधिकारी (ABEO) पर अपने ही मातहत कर्मचारियों के साथ बेहद अमर्यादित दुर्व्यवहार करने और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के गंभीर आरोप लगे हैं।

कार्यालय में कार्यरत कुल आठ लिपिकों (क्लर्कों) ने लामबंद होकर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के नाम विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) को एक लिखित शिकायत पत्र सौंपा है।

कर्मचारियों ने संबंधित अधिकारी के तानाशाही रवैये पर गहरा आक्रोश जताते हुए उनके खिलाफ तत्काल सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की है।

सौंपे गए संयुक्त शिकायत पत्र में लिपिकों ने आरोप लगाया है कि सहायक खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा आए दिन दफ्तर में कर्मचारियों के साथ अपशब्दों और अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया जाता है। छोटी-छोटी बातों पर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित और प्रताड़ित करने की धमकी दी जाती है।

पीड़ित लिपिकों का साफ कहना है कि अधिकारी के इस अड़ियल और अभद्र व्यवहार के कारण कार्यालय का माहौल लगातार तनावपूर्ण और काम करने के सर्वथा अयोग्य बना हुआ है। इस मानसिक दबाव का सीधा और बुरा असर कर्मचारियों के रोजमर्रा के शासकीय कामकाज और उनकी कार्यक्षमता पर भी पड़ रहा है।

इस पूरे मामले में जो सबसे हैरान करने वाली बात सामने आई है, वह है प्रशासनिक सुस्ती। बताया जा रहा है कि पीड़ित कर्मचारियों द्वारा यह लिखित शिकायत बीते 27 मई 2026 को ही आधिकारिक रूप से दर्ज करा दी गई थी।

लेकिन बेहद संवेदनशील मामला होने के बावजूद अब करीब डेढ़ महीने से भी अधिक का लंबा समय बीत चुका है और विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा आरोपी अधिकारी के खिलाफ अब तक कोई भी ठोस या प्रारंभिक कार्रवाई नहीं की गई है। शासन-प्रशासन के इस उदासीन रवैये से नाराज कर्मचारियों में असंतोष और आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।

यह गंभीर शिकायत सार्वजनिक होने के बाद से दुर्गुकोंदल खंड शिक्षा कार्यालय में हड़कंप की स्थिति निर्मित हो गई है। दफ्तर के कर्मचारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि समय रहते वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले में निष्पक्ष जांच कर उचित दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित नहीं की, तो वे अपने आत्मसम्मान की रक्षा के लिए आगे सामूहिक रूप से काम बंद कर उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाने पर मजबूर हो जाएंगे।

दूसरी ओर, इस पूरे विवाद पर अब तक शिक्षा विभाग के जिला स्तरीय या संभागीय वरिष्ठ अधिकारियों की तरफ से कोई भी आधिकारिक बयान या पक्ष सामने नहीं आया है।

साथ ही, शिकायत पत्र में अधिकारी पर लगाए गए इन गंभीर आरोपों की अभी तक कोई स्वतंत्र विधिक पुष्टि नहीं हो सकी है। मामले की उच्च स्तरीय जांच पूरी होने के बाद ही विभागीय हकीकत और वास्तविक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।