Bilaspur/बिजली वितरण व्यवस्था में सुरक्षा और हादसों की रोकथाम के लिए जारी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के पालन को लेकर chhattisgarh highcourt ने गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने chhattisgarh राज्य विद्युत वितरण कंपनी (CSPDCL) से जवाब तलब करते हुए पूछा है कि SOP लागू करने में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने का क्या प्रावधान है।

चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच ने जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान कंपनी के सक्षम अधिकारी को तीन सप्ताह के भीतर शपथपत्र पेश करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने कहा कि 21 अगस्त 2026 को जारी SOP का अवलोकन करने पर प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि बिजली वितरण व्यवस्था के रखरखाव, आम लोगों की सुरक्षा और SOP के क्रियान्वयन में लापरवाही करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने के संबंध में स्पष्ट प्रावधान नहीं है।

डिवीजन बेंच ने कंपनी से यह भी बताने को कहा है कि SOP को प्रभावी ढंग से लागू करने और आम लोगों को बिजली सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। इसके साथ ही शपथपत्र में यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया गया है कि SOP का पालन नहीं करने और अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए या नहीं।

जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास और विद्युत वितरण कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज परांजपे ने पक्ष रखा। कोर्ट ने बिजली कंपनी के सक्षम अधिकारी से निर्धारित समय-सीमा में विस्तृत जानकारी मांगी है।

मामले की अगली सुनवाई के लिए highcourt ने 7 दिसंबर 2026 की तारीख तय की है। अब बिजली कंपनी के जवाब से स्पष्ट होगा कि SOP के पालन, बिजली वितरण व्यवस्था के रखरखाव, जनसुरक्षा और लापरवाही के मामलों में जवाबदेही तय करने के लिए क्या व्यवस्था की गई है।