CG News।सुपरिंटेंडेंट इंजीनियरों की पदोन्नति और पदस्थापना पर लगी रोक के कारण सरकारी परियोजनाओं पर पड़ रहे असर को देखते हुए छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु के सिंगल बेंच ने अंतरिम आदेश में आंशिक बदलाव कर दिया है।

कोर्ट ने 25 फरवरी 2026 के पदोन्नति आदेश में से छह सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर SE के पद खाली रखने की शर्त पर सरकार को बाकी पदों पर पदस्थापना आदेश जारी करने की अनुमति दे दी है।

हालांकि इन पदों पर पदस्थापना और वरिष्ठता चार याचिकाओं के अंतिम फैसले के अधीन रहेगी। याचिका की अंतिम सुनवाई के लिए कोर्ट ने एक दिसंबर 2026 की तिथि तय कर दी है।

6 कार्यपालन अभियंताओं की याचिकाओं से रुकी थी पदस्थापना

राज्य की ओर से पैरवी करते हुए महाधिवक्ता कार्यालय के लॉ अफसरों ने कोर्ट को बताया, 24 मार्च और 21 जुलाई 2026 को दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी किया था।

हाई कोर्ट के आदेश के मद्देनजर सुपरिंटेंडेंट इंजीनियरों की पदस्थापना नहीं हो पा रही है। राज्य सरकार ने कहा, इससे विभिन्न सरकारी परियोजनाओं के क्रियान्वयन का काम अटक रहा है और परियोजनाएं प्रभावित हो रही है।

राज्य सरकार ने कोर्ट के सामने रखा ये प्रस्ताव

राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता ने प्रस्ताव रखा कि 6 याचिकाकर्ता वर्तमान में कार्यपालन अभियंता हैं, इसलिए पदोन्नति आदेश में से 6 पद खाली रखे जाएं और बाकी सुपरिंटेंडेंट इंजीनियरों की पदस्थापना की अनुमति दी जाए।

याचिकाकर्ताओं को छोड़कर राज्य सरकार के इस प्रस्ताव पर अन्य निजी पक्षकारों ने आपत्ति नहीं की।

कोर्ट ने 6 पद खाली रखने की शर्त पर रोक में किया बदलाव

हाई कोर्ट ने माना कि पूरी पदस्थापना रोकने से राज्य के विभिन्न काम प्रभावित हो रहे हैं। इसलिए 24 मार्च और 21 जुलाई के अंतरिम आदेशों में बदलाव करते हुए राज्य सरकार को 25 फरवरी के पदोन्नति आदेश के तहत बाकी सुपरिंटेंडेंट इंजीनियरों की पदस्थापना करने की अनुमति दी गई। हालांकि छह पद खाली रखने होंगे। इन पदों पर पदस्थापना और संबंधित वरिष्ठता का निर्धारण याचिकाओं के अंतिम फैसले के अधीन रहेगा।