Cg news।रायपुर: छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा विभाग और सहायक शिक्षकों के बीच चल रहा गतिरोध थमता नजर नहीं आ रहा है। छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन और स्कूल शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों के बीच सोमवार को हुई एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक बिना किसी ठोस निष्कर्ष के समाप्त हो गई।

फेडरेशन के प्रतिनिधिमंडल ने अपनी सात सूत्रीय मांगों को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव से मुलाकात की और हर बिंदु पर विस्तार से चर्चा की। हालांकि, किसी भी मांग पर आपसी सहमति नहीं बनने के कारण यह उच्च स्तरीय वार्ता पूरी तरह बेनतीजा रही।

सरकार के इस कड़े रुख से नाराज होकर फेडरेशन ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए आगामी 15 जुलाई 2026 को राजधानी रायपुर में बड़े पैमाने पर विधानसभा घेराव करने की आधिकारिक घोषणा कर दी है।

सोमवार को हुई इस बैठक के दौरान फेडरेशन के प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा सचिव को अपनी मांगों का एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा और प्रदेश के सहायक शिक्षकों की लंबे समय से लंबित समस्याओं पर अपना मजबूत पक्ष रखा। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों ने शिक्षकों के सभी बिंदुओं को गंभीरता से सुना जरूर, लेकिन किसी भी मांग पर तत्काल कोई सकारात्मक या ठोस निर्णय नहीं लिया गया।

सरकार की इस बेरुखी से नाराज शिक्षक संगठन ने अब अपने पूर्व निर्धारित आंदोलन कार्यक्रम को और तेज गति से जारी रखने का मन बना लिया है।

तीन चरणों में होगा बड़ा आंदोलन, सांसदों-विधायकों को सौंपेंगे ज्ञापन फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राठौर ने बैठक के बाद आयोजित एक प्रेस वार्ता में कहा कि संगठन ने पूरी तरह से लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी जायज मांगों को सरकार तक पहुंचाने का हर संभव प्रयास किया। लेकिन जब शासन-प्रशासन के स्तर पर कोई ठोस और लिखित निर्णय नहीं हुआ, तो मजबूरन आंदोलन का रास्ता चुनना ही हमारे पास अंतिम विकल्प बचा है। उन्होंने बताया कि शिक्षकों का यह आंदोलन कुल तीन रणनीतिक चरणों में पूरा होगा।

रणनीति के पहले चरण के तहत सोमवार को शिक्षा सचिव से सीधी चर्चा की गई। अब दूसरे चरण में संगठन के पदाधिकारी और शिक्षक प्रदेशभर के सभी सांसदों और विधायकों से उनके निवास पर मुलाकात करेंगे और उन्हें अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपकर समर्थन मांगेंगे। इसके बाद, तीसरे और सबसे निर्णायक चरण में 15 जुलाई को प्रदेशभर के हजारों सहायक शिक्षक रायपुर में जुटेंगे और विधानसभा का ऐतिहासिक घेराव करेंगे।

“मोदी की गारंटी” के वादे पूरे करे सरकार: शिक्षक फेडरेशन प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राठौर ने सरकार को याद दिलाते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान प्रदेश के सहायक शिक्षकों से जो भी वादे किए गए थे, अब वर्तमान सरकार को उन्हें हर हाल में पूरा करना चाहिए। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि “मोदी की गारंटी” के तहत प्रदेश के शिक्षकों को जो भी आश्वासन और भरोसे दिए गए थे, अब उन्हें धरातल पर पूरी ईमानदारी से लागू करने का सही समय आ गया है और शिक्षक अपने हक के लिए पीछे नहीं हटेंगे।

ये हैं फेडरेशन की प्रमुख 7 सूत्रीय मांगें:

  • शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से संबंधित सभी लंबित मामलों पर विभाग शीघ्र और सकारात्मक निर्णय ले।
  • शिक्षकों की प्रथम नियुक्ति तिथि (जॉइनिंग डेट) से ही पूरी सेवा की गणना की जाए और उन्हें पूर्व सेवा अवधि का पूर्ण लाभ प्रदान किया जाए।
  • प्रदेश की उन सभी शालाओं में, जहां केवल एक ही शिक्षक पदस्थ है (एकल शिक्षकीय शालाएं), वहां तत्काल पर्याप्त संख्या में नए शिक्षकों की नियुक्ति की जाए।
  • विभाग द्वारा चलाए जा रहे युक्तियुक्तकरण (तर्कसंगत वितरण) अभियान के दौरान जिन शालाओं को आपस में मर्ज (विलय) किया गया है, वहां के शिक्षकों और छात्रों के साथ न्याय किया जाए।
  • दोनों संबंधित संस्थाओं से सचिव एवं कोषाध्यक्ष का विधिवत चयन कर उनकी वित्तीय भागीदारी को पूरी तरह सुनिश्चित किया जाए।

प्रदेशभर के शिक्षकों से रायपुर पहुंचने की अपील फेडरेशन के शीर्ष नेतृत्व ने छत्तीसगढ़ के सभी जिला और ब्लॉक पदाधिकारियों के साथ-साथ प्रदेशभर के कोने-कोने में पदस्थ सहायक शिक्षकों से अपील की है कि वे अपनी जायज मांगों के समर्थन में 15 जुलाई को प्रस्तावित विधानसभा घेराव कार्यक्रम में भारी से भारी संख्या में राजधानी रायपुर पहुंचें।

इस प्रेस वार्ता के दौरान फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राठौर के साथ प्रदेश संयोजक मनीष मिश्रा, प्रदेश उपाध्यक्ष देवेंद्र हरमुख, प्रदेश सचिव राजू टंडन, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष सिराज बख्श, आदित्य गौरव साहू, रंजीत बनर्जी और विकास कायरकर सहित संगठन के अन्य कई वरिष्ठ पदाधिकारी और शिक्षक प्रतिनिधि मुख्य रूप से मौजूद रहे।