बिलासपुर। हवाई सुविधा जन संघर्ष समिति ने हवाई सुविधा की कमी को पुराने बिलासपुर जिले मैं पर्यटन की संभावनाएं असीम होने के बावजूद विकसित न होने को एक बड़ा कारण बताया है।

समिति ने बताया की कोरबा जिले का सतरेंगा और चैतुरगढ़ और बिलासपुर जिले का अचानक मार टाइगर रिजर्व तथा मध्य प्रदेश का अमरकंटक जैसे पर्यटन स्थल बिलासपुर एयरपोर्ट के 100 किलोमीटर की सीमा में है।

हवाई सुविधा जन संघर्ष समिति ने कहा कि अगर एयरपोर्ट से देश के सभी दिशाओं में रेगुलर फ्लाइट उपलब्ध हो जाएगी तो उसे स्थिति में महानगरों के पर्यटक भी इन स्थलों पर जल्दी और सीधे पहुंच सकेंगे। आज रायपुर से अमरकंटक पहुंचने के लिए 6 घंटे का समय लगता है वही सतरंग और चतुर्गढ़ के लिए भी 4 से 5 घंटे का समय जरूरी है।

बिलासपुर एयरपोर्ट से यह समय घटकर आधा रह जाएगा। कोई भी अंतर्देशी पर्यटक डेढ़ से 2 घंटे की फ्लाइट लेने के बाद 5 से 6 घंटा सड़क मार्ग से यात्रा नहीं करना चाहता वह चाहता है कि 2 घंटे में अपने घंटा भी पर पहुंच जाए। इस हिसाब से बिलासपुर में अगर 4c एयरपोर्ट बनाकर देश के सभी दिशाओं से उड़ान की सुविधा उपलब्ध होती है तो इसका लाभ पूरे क्षेत्र के पर्यटन स्थलों को मिलेगा।

हवाई सुविधा जन संघर्ष समिति ने आगे कहा कि बिलासपुर में एक 4 सी एयरपोर्ट का होना पूरे उत्तर छत्तीसगढ़ के लिए विकास के नए द्वार खोलेगा जो इन्वेस्टमेंट अभी रायपुर और उसके आसपास ही सीमित रह जा रहा है वह उत्तर छत्तीसगढ़ में भी निवेश होगा।

हवाईसुविधा जन संघर्ष समिति का महा धरना आज भी जारी रहा और आगमन के कम से  रवि बनर्जी ,बद्री यादव ,अनिल गुलहरे, संतोष पीपलवा, परसराम कैवर्त चित्रकांत श्रीवास शिरीष कश्यप समीर अहमद बबला रामशरण यादव ,विभूतिभूषण गौतम ,प्रतीक तिवारी, प्रकाश बहरानी ,मनोज तिवारी महेश दुबे मजहर खान अमर बजाज विजय दशहरा अकील अली आदि उपस्थित थे।