CG News-छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य के एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के बार-बार किए जा रहे तबादले को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने मानवीय और विधिक पहलुओं पर गौर करते हुए नवा रायपुर मुख्यालय में पदस्थ एक वाहन चालक के रायगढ़ स्थानांतरण आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से माना कि महज 15 महीने के छोटे से अंतराल के भीतर एक छोटे कर्मचारी का दोबारा तबादला करना प्रथम दृष्टया न्यायसंगत प्रतीत नहीं होता है।

यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ मर्यादित के नवा रायपुर मुख्यालय से जुड़ा है। यहां वाहन चालक के रूप में कार्यरत वैभव शुक्ला को विभाग ने 8 जून 2026 को आदेश जारी कर जिला लघु वनोपज संघ, रायगढ़ स्थानांतरित कर दिया था।

इस आदेश को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने अधिवक्ता पी. आचार्य के माध्यम से हाई कोर्ट की शरण ली। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि वैभव शुक्ला को इससे पहले 19 फरवरी 2025 को ही धरमजयगढ़ से रायपुर भेजा गया था, जहां उन्होंने 6 मार्च 2025 को कार्यभार संभाला था। रायपुर में जॉइनिंग दिए उन्हें अभी केवल 15 महीने ही हुए थे कि विभाग ने दोबारा उनका ट्रांसफर कर दिया।

हाई कोर्ट में पेश याचिका में विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पक्षपात के आरोप भी लगाए गए। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि रायपुर मुख्यालय में ऐसे कई अन्य वाहन चालक भी पदस्थ हैं जो लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं, लेकिन उन्हें नहीं हटाया गया। महज 15 महीनों में एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का दोबारा तबादला करना स्थापित स्थानांतरण नीति के खिलाफ है और यह कर्मचारी को बेवजह परेशान करने की श्रेणी में आता है।

हालांकि, लघु वनोपज संघ की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता त्रिविक्रम नायक ने इन तर्कों का विरोध किया। उन्होंने कोर्ट को आश्वस्त करने की कोशिश की कि यह स्थानांतरण किसी दुर्भावना के तहत नहीं, बल्कि विशुद्ध रूप से प्रशासनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए किया गया है और इसमें कोई भी विधिक अवैधता नहीं है।

दोनों पक्षों की गंभीरता से दलीलें सुनने के बाद जस्टिस बीडी गुरु ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के हितों और सेवा शर्तों को प्राथमिकता दी। कोर्ट ने माना कि बार-बार तबादला करना किसी भी कर्मचारी के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, विशेषकर तब जब वह निचले पायदान का कर्मचारी हो।

अदालत ने राहत प्रदान करते हुए 8 जून 2026 के तबादला आदेश के क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 24 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है।