CG News -बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) और छत्तीसगढ़ शिक्षक पात्रता परीक्षा (CGTET) के न्यूनतम उत्तीर्ण अंकों में असमानता को चुनौती देने वाली एक और रिट याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है।

जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की एकल पीठ (सिंगल बेंच) ने इस मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य सरकार द्वारा एक नीतिगत निर्णय के तहत दोनों परीक्षाओं के कट-ऑफ में जो अंतर तय किया गया है, वह ‘उचित वर्गीकरण’ (Reasonable Classification) के कानूनी दायरे में आता है।

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अदालत ने साफ किया कि इस नीति को किसी भी प्रकार से मनमाना, भेदभावपूर्ण या असंवैधानिक नहीं ठहराया जा सकता। इसी के साथ कोर्ट ने बालोद जिले के एक उम्मीदवार द्वारा दायर याचिका को पूर्व में पारित एक नजीर फैसले के आधार पर निरस्त कर दिया है।

यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित शिक्षक भर्ती नियमों से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता लिखेन्द्र कुमार साहू (निवासी ग्राम कोलिहामार, जिला बालोद) ने हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर कर राज्य शासन और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के उस नियम को चुनौती दी थी, जिसके तहत आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए CTET और CGTET के उत्तीर्ण अंकों के प्रतिशत में अंतर रखा गया था। याचिकाकर्ता का तर्क था कि जब दोनों ही परीक्षाएं शिक्षक बनने की अनिवार्य योग्यता तय करती हैं।

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तो केंद्रीय और राज्य स्तर की परीक्षा के न्यूनतम उत्तीर्ण अंकों में अंतर रखना समानता के अधिकार का सीधा उल्लंघन है, और इस नियम की वजह से राज्य के कई योग्य उम्मीदवार चयन प्रक्रिया से बाहर हो रहे हैं।

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अजय कुमरानी और राज्य शासन की ओर से उप-शासकीय अधिवक्ता कंवलजीत सिंह सैनी ने अदालत को अवगत कराया कि इस याचिका में उठाया गया कानूनी मुद्दा अब नया नहीं रह गया है। इस विषय पर हाई कोर्ट की सिंगल बेंच पहले ही याचिकाओं के एक बड़े समूह (बैच) पर विस्तार से सुनवाई कर अपना अंतिम और मुख्य फैसला सुना चुकी है।

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हाई कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने अपनी प्रशासनिक और भौगोलिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एक नीतिगत निर्णय लिया है। इसके तहत केंद्रीय पात्रता परीक्षा (CTET) और राज्य पात्रता परीक्षा (CGTET) के बीच एक तार्किक और उचित वर्गीकरण किया गया है।

सरकार ने CGTET में राज्य के अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और दिव्यांग श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए उत्तीर्ण अंकों में 10% तक की बड़ी छूट दी है, जबकि केंद्रीय स्तर की CTET परीक्षा में यह छूट 5% निर्धारित है।

अदालत ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि सरकार की इस नीति का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर आरक्षित वर्ग को अधिक अवसर प्रदान करना है, जिसे भेदभावपूर्ण नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने अंत में कहा कि सरकार के ऐसे प्रशासनिक और नीतिगत निर्णयों में न्यायिक हस्तक्षेप करने का कोई ठोस या विधिक आधार मौजूद नहीं है।

इसी के साथ हाई कोर्ट ने पूर्व में जारी मुख्य आदेश की शर्तों और नजीर को लागू करते हुए बालोद के याचिकाकर्ता की इस रिट याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया।