CG Medical Bill Claim/रायपुर। छत्तीसगढ़ के शासकीय कर्मचारियों, शिक्षकों और उनके आश्रित परिवारों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मंजूरी मिल गई है। इस फैसले से कर्मचारियों को इलाज के बाद मेडिकल बिल की प्रतिपूर्ति के लिए लंबी सरकारी प्रक्रिया से गुजरने की परेशानी कम होने की उम्मीद है।

नई व्यवस्था लागू होने पर पात्र कर्मचारियों को इलाज के लिए पहले अपनी जेब से बड़ी रकम खर्च कर बाद में क्लेम की मंजूरी का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

अब तक की व्यवस्था में कर्मचारियों को इलाज के बाद मेडिकल बिल जमा कर उसकी प्रतिपूर्ति के लिए विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। कई मामलों में फाइलें अलग-अलग स्तरों पर अटकी रहती थीं। कहीं कमेटी की बैठक नहीं होने से निर्णय लंबित रहता था, तो कहीं क्लेम खारिज होने के बाद कर्मचारी न्यायालय की शरण लेने को मजबूर होते थे। इससे कर्मचारियों का समय और पैसा दोनों खर्च होता था।

बताया जा रहा है कि मंत्रालय स्तर पर करीब एक हजार और चिकित्सा शिक्षा संचालनालय में 400 से अधिक अधिकारियों-कर्मचारियों के मेडिकल क्लेम की फाइलें लंबित हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे मामलों की बताई जा रही है, जिनमें कर्मचारियों ने दूसरे राज्यों में इलाज कराने के बाद प्रतिपूर्ति के लिए बिल प्रस्तुत किए हैं।CG Medical Bill Claim

इन प्रकरणों के निराकरण के लिए फाइलें मंत्रालय तक भेजी जाती हैं और कमेटी के माध्यम से निर्णय लिया जाता है। कई बार बैठक नहीं होने या सीमित मामलों पर ही निर्णय होने के कारण लंबित फाइलों की संख्या बढ़ती जाती है।

मेडिकल क्लेम की जटिल प्रक्रिया का एक उदाहरण मंत्रालय के वित्त विभाग में पदस्थ अधिकारी जयंत देवांगन का मामला है। जानकारी के अनुसार, वे करीब 65 हजार रुपये के मेडिकल क्लेम के भुगतान के लिए पांच से छह साल से प्रयास कर रहे हैं। बताया गया है कि इस मामले में बिलासपुर हाई कोर्ट का फैसला भी उनके पक्ष में आ चुका है, इसके बावजूद भुगतान अब तक लंबित है। ऐसे मामलों को लेकर कर्मचारियों में लंबे समय से नाराजगी रही है।

कर्मचारी संगठनों का मानना है कि कैशलेस इलाज की व्यवस्था लागू होने से ऐसी परेशानियों में कमी आएगी। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा ने कहा कि कैशलेस चिकित्सा सुविधा फेडरेशन की 11 सूत्रीय मांगों में शामिल थी। उन्होंने इसे कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय बताया।CG Medical Bill Claim

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि संगठन लंबे समय से शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए कैशलेस इलाज की मांग कर रहा था। वहीं, शिक्षक कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष संजय तिवारी ने कहा कि नई व्यवस्था से गंभीर बीमारियों के इलाज के दौरान कर्मचारियों और उनके परिजनों को आर्थिक राहत मिलेगी।

कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब इस सुविधा को लागू करने के लिए नियमों और प्रक्रिया का निर्धारण महत्वपूर्ण होगा। कर्मचारियों को वास्तविक राहत इस बात पर निर्भर करेगी कि कैशलेस इलाज का दायरा क्या होगा, किन अस्पतालों में सुविधा मिलेगी और उपचार के लिए किन शर्तों का पालन करना होगा। फिलहाल इस फैसले से प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों और शिक्षक संगठनों में उम्मीद जगी है कि मेडिकल क्लेम के भुगतान में होने वाली लंबी देरी और विभागीय परेशानियों से छुटकारा मिल सकेगा।