up chunav 2027/उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित ललितपुर जिला अपनी भौगोलिक बनावट, प्राचीन इतिहास और राजनीतिक पहचान के कारण खास महत्व रखता है। इस जिले की एक अनोखी विशेषता यह है कि यह लगभग तीन तरफ से मध्य प्रदेश से घिरा हुआ है। पूर्व में टीकमगढ़, दक्षिण में सागर और पश्चिम में अशोकनगर व शिवपुरी जिले इसकी सीमाओं से लगे हैं। जिले का नाम इसके मुख्यालय शहर ललितपुर के नाम पर पड़ा है। बुंदेलखंड के इस इलाके में इतिहास, संस्कृति और राजनीति की एक लंबी विरासत देखने को मिलती है।

राजनीतिक दृष्टि से ललितपुर जिले में दो विधानसभा क्षेत्र हैं—ललितपुर और महरौनी। दोनों सीटों पर भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं। ललितपुर विधानसभा सामान्य सीट है, जहां से रामरतन कुशवाहा विधायक हैं। वहीं महरौनी विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। यहां से मनोहर लाल पंथ, जिन्हें मन्नू कोरी के नाम से भी जाना जाता है, विधायक हैं। वे राज्य सरकार में राज्यमंत्री भी हैं। उन्होंने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में लगातार दूसरी बार इस सीट से जीत दर्ज की थी। महरौनी विधानसभा क्षेत्र झांसी लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है।

up chunav 2027/ललितपुर का इतिहास काफी पुराना माना जाता है। इस क्षेत्र का उल्लेख यज्ञ पुराण, विष्णु पुराण और वराह पुराण जैसे प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में मिलने की बात कही जाती है। रामायण और महाभारत से भी इस क्षेत्र को जोड़कर देखा जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, राजा सुमेर सिंह ने ललितपुर शहर की स्थापना की थी और अपनी पत्नी ललिता के नाम पर इसका नाम रखा था। हालांकि, शहर की स्थापना से जुड़ी इस कथा को ऐतिहासिक मान्यता के बजाय स्थानीय परंपरा के रूप में देखा जाता है।

इतिहास के अलग-अलग दौर में ललितपुर क्षेत्र पर कई राजवंशों का प्रभाव रहा। बताया जाता है कि कभी इस इलाके पर गोंड राजाओं का अधिकार था। बाद में बुंदेलों ने इस क्षेत्र पर अपना प्रभाव स्थापित किया। बुंदेला शासकों और उनके उत्तराधिकारियों के विस्तार के साथ यह इलाका चंदेरी के बुंदेला राज्य का हिस्सा बन गया। इस तरह ललितपुर का इतिहास बुंदेलखंड और चंदेरी की राजनीतिक विरासत से गहराई से जुड़ गया।

18वीं शताब्दी में बुंदेलखंड के अन्य क्षेत्रों की तरह चंदेरी भी मराठा शासन के प्रभाव में आ गया। पड़ोसी ग्वालियर के शासक दौलत राव सिंधिया ने 1811 में चंदेरी राज्य पर कब्जा कर लिया। इसके बाद 1812 में कर्नल बैपटिस्ट को चंदेरी के प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई और यह क्षेत्र उनका मुख्यालय बना। इस दौर में ललितपुर और आसपास के इलाके की प्रशासनिक व्यवस्था में कई बदलाव हुए।

up chunav 2027/वर्ष 1844 में चंदेरी के पूर्व राज्य का क्षेत्र अंग्रेजों को सौंप दिया गया।

इसके बाद ललितपुर शहर को जिला मुख्यालय बनाकर ब्रिटिश भारत में चंदेरी जिला गठित किया गया। वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान अंग्रेजों का इस क्षेत्र पर नियंत्रण कमजोर पड़ गया और उन्होंने जिले का प्रशासनिक अधिकार खो दिया। 1858 के अंत तक अंग्रेजों ने दोबारा इस क्षेत्र पर नियंत्रण स्थापित कर लिया। इसके बाद 1861 में चंदेरी सहित बेतवा नदी के पश्चिम का हिस्सा ग्वालियर राज्य को लौटा दिया गया, जबकि शेष क्षेत्र को ललितपुर जिला नाम दिया गया।

प्रशासनिक पुनर्गठन के दौरान 1891 में ललितपुर और झांसी जिलों को मिलाकर झांसी जिला बना दिया गया। इसे इलाहाबाद डिवीजन में शामिल किया गया। बाद में प्रशासनिक सुविधा और क्षेत्रीय विकास को ध्यान में रखते हुए 1 मार्च 1974 को ललितपुर को फिर से अलग जिला बनाया गया। इसका गठन झांसी जिले की ललितपुर और महरौनी तहसीलों को मिलाकर किया गया था।