up chunav 2027/उत्तर प्रदेश की राजनीति में बुंदेलखंड का अपना अलग महत्व है। इस क्षेत्र का प्रमुख केंद्र माने जाने वाले झांसी जिले की सियासत भी प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों में अहम भूमिका निभाती है। वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की धरती के रूप में प्रसिद्ध झांसी को बुंदेलखंड का द्वार कहा जाता है। यह जिला न केवल ऐतिहासिक विरासत के लिए जाना जाता है, बल्कि यहां की चार विधानसभा सीटों का अपना अलग राजनीतिक और सामाजिक समीकरण भी है।

up chunav 2027/उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में झांसी जिले में चार सीटें आती हैं—बबीना, झांसी नगर, मऊरानीपुर और गरौठा। मौजूदा विधानसभा में इनमें से तीन सीटों पर भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं, जबकि एक सीट भाजपा की सहयोगी पार्टी अपना दल (सोनेलाल) के पास है। इस तरह जिले की चारों सीटों पर एनडीए के विधायक हैं।

बबीना विधानसभा क्षेत्र उत्तर प्रदेश की 403 सीटों में 222वें क्रम पर है। यह सामान्य यानी अनारक्षित सीट है। पिछले चुनाव के दौरान यहां करीब 3,31,743 पंजीकृत मतदाता थे। वर्तमान में इस सीट से भाजपा के राजीव सिंह ‘परिच्छा’ विधायक हैं।

झांसी नगर विधानसभा सीट जिले की प्रमुख और चर्चित सीटों में शामिल है। यह प्रदेश की 223वीं विधानसभा सीट है। पिछले चुनाव में यहां करीब 4,22,164 मतदाता पंजीकृत थे, जो जिले की चारों सीटों में सबसे अधिक संख्या थी। इस सीट से भाजपा के रवि शर्मा विधायक हैं।

मऊरानीपुर विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश की 224वीं सीट है और झांसी जिले की इकलौती आरक्षित विधानसभा सीट है। यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। पिछले चुनाव में यहां करीब 4,13,770 पंजीकृत मतदाता थे। वर्तमान में इस सीट का प्रतिनिधित्व अपना दल (सोनेलाल) की डॉ. रश्मि आर्या कर रही हैं।up chunav 2027

गरौठा विधानसभा क्षेत्र प्रदेश की 225वीं सीट है। यह सामान्य श्रेणी की सीट है। पिछले चुनाव में यहां लगभग 3,51,859 मतदाता पंजीकृत थे। इस सीट से भाजपा के जवाहर लाल राजपूत विधायक हैं। इस तरह झांसी जिले की चार सीटों में भाजपा के तीन और उसके सहयोगी दल का एक विधायक है।up chunav 2027

भौगोलिक स्थिति की बात करें तो झांसी जिला उत्तर प्रदेश के दक्षिणी हिस्से में स्थित है और झांसी मंडल का प्रशासनिक मुख्यालय भी है। इसके उत्तर में जालौन, पूर्व में हमीरपुर और महोबा, दक्षिण में मध्य प्रदेश का टीकमगढ़, दक्षिण-पश्चिम में ललितपुर और उत्तर-पूर्व में मध्य प्रदेश का दतिया जिला स्थित है। झांसी शहर पहुंज नदी के तट पर, पहुंज और बेतवा नदियों के बीच लगभग 285 मीटर की ऊंचाई पर बसा है। नई दिल्ली से इसकी दूरी करीब 415 किलोमीटर बताई जाती है।

झांसी का इतिहास वीरता और संघर्ष की गाथाओं से जुड़ा है। शहर की पहचान इसके ऐतिहासिक किले और पत्थर की प्राचीन संरचनाओं से भी होती है। यह कभी मराठा शासकों की झांसी रियासत की राजधानी था। वर्ष 1817 से 1854 के बीच शहर को बलवंतनगर के नाम से भी जाना जाता था। 1854 में अंग्रेजों ने झांसी पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 1857 के विद्रोह के दौरान रानी लक्ष्मीबाई ने जून 1857 से जून 1858 तक झांसी में शासन किया और अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ संघर्ष का नेतृत्व किया। उनकी वीरता ने झांसी को देश के इतिहास में एक विशिष्ट पहचान दिलाई।

आज झांसी सड़क और रेल नेटवर्क के माध्यम से उत्तर प्रदेश के साथ-साथ देश के अन्य प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। पश्चिम-पूर्व गलियारे के झांसी से होकर गुजरने से क्षेत्र की कनेक्टिविटी और विकास की संभावनाओं को बढ़ावा मिला है। प्रशासनिक इतिहास में भी झांसी और ललितपुर का गहरा संबंध रहा है। वर्ष 1891 में ललितपुर को झांसी जिले में शामिल किया गया था, जबकि 1 मार्च 1974 को उसे दोबारा अलग जिला बना दिया गया।