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जग्गी हत्याकांड में बड़ा पलटाव: 20 साल बाद अमित जोगी दोषी…3 हफ्ते में सरेंडर का आदेश

निचली अदालत का फैसला उलटा—लंबी कानूनी लड़ाई के बाद केस ने लिया निर्णायक मोड़

बिलासपुर ..छत्तीसगढ़ की राजनीति और न्यायिक इतिहास से जुड़े बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। करीब दो दशक बाद अदालत ने केस की दिशा बदलते हुए अमित जोगी को दोषी करार दिया और तीन हफ्ते के भीतर सरेंडर करने का आदेश जारी किया।

स्पेशल डिवीजन बेंच—चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद वर्मा—ने अंतिम सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने साफ किया कि उपलब्ध साक्ष्य और जांच सामग्री आरोपों को सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं।

निचली अदालत का फैसला उलटा

इस केस में 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए अमित जोगी को बरी कर दिया था, जबकि अन्य आरोपियों को सजा सुनाई गई थी। अब हाईकोर्ट ने उस फैसले को पलटते हुए केस का नया निष्कर्ष सामने रखा है।

यह पलटाव सिर्फ एक आरोपी तक सीमित नहीं, बल्कि उस पूरी न्यायिक प्रक्रिया पर भी सवाल खड़ा करता है, जिसमें एक ही केस में दो अलग-अलग निष्कर्ष सामने आए।

CBI रिपोर्ट बनी निर्णायक आधार

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद केस दोबारा खुला और CBI ने विस्तृत जांच रिपोर्ट अदालत के सामने रखी। करीब 11 हजार पन्नों की इस रिपोर्ट में घटनाक्रम, साजिश और साक्ष्यों की कड़ियां जोड़ी गईं।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने समय की मांग की, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया और अंतिम निर्णय सुना दिया—यह संकेत भी स्पष्ट रहा कि अदालत अब देरी के बजाय निष्कर्ष चाहती है।

हत्या से हिल गई थी प्रदेश की राजनीति

4 जून 2003 को रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या की गई थी। वे एक प्रभावशाली कारोबारी थे और राजनीतिक तौर पर भी सक्रिय भूमिका में थे। घटना के बाद प्रदेश की राजनीति में तीखी प्रतिक्रिया और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला।

जांच में इस हत्या को साजिश से जोड़ते हुए कई नाम सामने आए, जिससे मामला सामान्य अपराध से आगे बढ़कर राजनीतिक षड्यंत्र के दायरे में पहुंच गया।

परिवार की कानूनी लड़ाई और निर्णायक मोड़

मृतक के परिजनों ने फैसले को चुनौती देते हुए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंचा और फिर हाईकोर्ट में दोबारा सुनवाई का रास्ता खुला।

यह फैसला उस संघर्ष का नतीजा है, जिसमें न्याय की मांग लगातार बनी रही और अंततः अदालत ने केस को नए सिरे से परखा।

पहले ही सजा पा चुके हैं अन्य आरोपी

इस हत्याकांड में शामिल अन्य आरोपियों को पहले ही उम्रकैद की सजा मिल चुकी है, जिसे हाईकोर्ट बरकरार रख चुका है। अब अमित जोगी के दोषी ठहराए जाने के बाद केस का सबसे चर्चित पहलू निर्णायक स्थिति में पहुंच गया है।

अब आगे क्या?

अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि अमित जोगी तीन हफ्तों के भीतर सरेंडर करें। इसके बाद सजा और आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।

Bhaskar Mishra

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 16 साल का अनुभव।विभिन्न माध्यमों से पत्रकारिता के क्षेत्र मे काम करने का अवसर मिला।यह प्रयोग अब भी जारी है।कॉलेज लाइफ के दौरान से पत्रकारिता से गहरा जुड़ाव हुआ।इसी दौरान दैनिक समय से जुडने का अवसर मिला।कहानी,कविता में विशेष दिलचस्पी ने पहले तो अधकचरा पत्रकार बनाया बाद में प्रदेश के वरिष्ठ और प्रणम्य लोगों के मार्गदर्शन में संपूर्ण पत्रकारिता की शिक्षा मिली। बिलासपुर में डिग्री लेने के दौरान दैनिक भास्कर से जु़ड़ा।2005-08 मे दैनिक हरिभूमि में उप संपादकीय कार्य किया।टूडे न्यूज,देशबन्धु और नवभारत के लिए रिपोर्टिंग की।2008- 11 के बीच ईटीवी हैदराबाद में संपादकीय कार्य को अंजाम दिया।भाग दौड़ के दौरान अन्य चैनलों से भी जुडने का अवसर मिला।2011-13 मे बिलासपुर के स्थानीय चैनल ग्रैण्ड न्यूज में संपादन का कार्य किया।2013 से 15 तक राष्ट्रीय न्यूज एक्सप्रेस चैनल में बिलासपुर संभाग व्यूरो चीफ के जिम्मेदारियों को निभाया। 1998-2000 के बीच आकाशवाणी में एनाउँसर-कम-कम्पियर का काम किया।वर्तमान में www.cgwall.com वेबपोर्टल में संपादकीय कार्य कर रहा हूं।
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