उड़ते रंग और अबीर के बीच शिक्षा विभाग में छूटी घोषणाओं की पिचकारी , देखिए – किसे क्या मिला….?

बिलासपुर (मनीष जायसवाल) । ऋतुराज बसंत के आगमन के साथ ही फागुन की आहट सुनाई देने लगती है। पेड़ों पर नई कोपलें मुस्कुराती हैं, सरसों के खेत पीली चादर ओढ़ लेते हैं और हवाओं में एक मीठी गुनगुनाहट घुल जाती है। यही वह समय है जब होली अपने पूरे रस राज रूप में सामने आती है.! रंग एक हो जाते हैं, मन सराबोर हो जाता है। ठंडाई का घूंट गले से उतरते ही जैसे रंगों का नशा सिर पर चढ़ जाता है। हंसी बेपरवाह हो जाती है, चेहरे पहचान से परे ढक जाते हैं और दुनिया कुछ पल के लिए उलट-पुलट होकर भी कितनी सीधी लगने लगती है..। शिकायतें भीग जाती हैं और रिश्ते फिर से रंग पकड़ लेते हैं।
कुछ ऐसा ही रंग इस बार बिलासपुर में भी चढ़ा। नगाड़ों की थाप पर शिक्षक नेता, शिक्षा मंत्री और कई विधायक फाग गाते नजर आए। रंगों की उड़ती अबीर के बीच घोषणाओं की पिचकारी छूटी संजय शर्मा, वीरेंद्र दुबे और कृष्ण कुमार नवरंग को जिला शिक्षा अधिकारी बनाए जाने का निर्णय सुनाया गया, हालांकि किस जिले में उनकी तैनाती होगी यह रंग अभी घुलना बाकी रहा..। केदार जैन और विकास राजपूत को डीएमसी बनाने का प्रस्ताव भी उसी सुर में उछला। शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए मनीष मिश्रा और रविंद्र राठौर को संचालक स्तर की जिम्मेदारी देने की बात कही गई।
फाग का रंग और गाढ़ा हुआ जब 148 विकासखंडों में सहायक शिक्षकों को सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी बनाने का रास्ता साफ करने की घोषणा हुई। एलबी संवर्ग के व्याख्याताओं को भी संगठन की अनुशंसा के आधार पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी बनाने का प्रस्ताव सामने आया। स्कूल शिक्षा को प्रभावी बनाने के नाम पर बिलासपुर के शिक्षक नेता आलोक पांडे को मंत्री का ओएसडी घोषित किया गया और तीन अन्य ओएसडी होली के बाद तय करने की बात भी रंगों के साथ उड़ती रही..।
सबसे ऊंचा सुर तब निकला जब ऑन-डिमांड ट्रांसफर की घोषणा हुई..! ढाई लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता के साथ, जिसे पांच सालों में वेतन से समायोजित किया जाएगा। इस रंगीन माहौल में पीएससी से चयनित सौ से अधिक सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी नाराज़ होकर फाग का त्याग करते हुए बाहर निकल गए। उनके जाते ही नारा गूंजा संख्या बल हमारा है, यही हमारा नारा है..! ढोल तेज हुआ, रंग गहरा हुआ और मंत्री जी भी उसी उमंग में थिरकते नजर आए। उस पल में कर्मचारी और मंत्री का फर्क जैसे गुलाल में ढंक गया।
इधर नेतृत्व को लेकर भी रंग बदले। पहले फेडरेशन की कमान भूपेन बनाफर को सौंपने की चर्चा थी, फिर यह प्रस्ताव आया कि प्रदेश के सभी शिक्षक संगठन एक मंच पर आए। युक्तिकरण आंदोलन के समय बिखरी लीडरशिप का हवाला देते हुए एक संयुक्त संगठन बनाने का निर्णय लिया गया। नाम क्या होगा । इस पर ऑनलाइन बैठकों में अब भी रंग उछल रहे हैं।
और अंत में एक जरूरी बात छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता में परंपरा रही है कि होली के दिन ऐसी उल्टी-पुल्टी खबरें छपती हैं, जो पाठकों को मुस्कराने का मौका देती हैं और व्यवस्था पर हल्की-सी रंगीन चुटकी लेती हैं। यह खबर भी उसी परंपरा का हिस्सा है। इसे होली के मनोरंजन के रूप में पढ़ा जाए, रंगों की तरह हल्के मन से क्योंकि बुरा न मानो होली है, भई होली है..।




