समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष akhilesh yadav ने एक बार फिर भारतीय राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने इस वर्ष आयोजित महाकुंभ को लेकर एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि यह धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि एक राजनीतिक मंच था, जिसका उद्देश्य योगी आदित्यनाथ को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में स्थापित करना था। अखिलेश ने सीधे तौर पर भाजपा पर समाज को धर्म और जाति के नाम पर बांटने का आरोप लगाया।

अखिलेश यादव ने कहा कि महाकुंभ के दौरान भाजपा की योजना थी कि योगी आदित्यनाथ को प्रधानमंत्री का चेहरा घोषित किया जाए। उन्होंने इसे एक “राजनीतिक कुंभ” करार दिया और दावा किया कि यह धार्मिक आस्था का नहीं, बल्कि एक राजनीतिक चाल का हिस्सा था।

उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा लगातार समाज में धार्मिक दरारें पैदा कर रही है और यह उसकी रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है।

अखिलेश यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि जो साम्प्रदायिक राजनीति समाजवादियों ने अयोध्या से खत्म करने की कोशिश की थी, वही अब और उग्र रूप में वापस आ रही है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा का खुद का वोट बैंक अब उसके खिलाफ हो गया है और लोगों में असंतोष है।

योगी सरकार पर जातिवादी रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि डीजीपी तक की नियुक्ति जाति आधारित हो रही है, और विधानसभा में गलत आंकड़े पेश किए जा रहे हैं।

समाजवादी पार्टी प्रमुख ने कहा कि भाजपा धर्म और जाति के नाम पर समाज में फूट डालने का संगठित प्रयास कर रही है और इसके लिए वह बड़ी मात्रा में धन भी खर्च कर रही है। उन्होंने यह भी जोड़ते हुए कहा कि जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं, वे भाजपा की सोच और कार्यशैली को ही दर्शाते हैं।

akhilesh yadav की यह तीखी टिप्पणी उस समय आई है जब भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की सुप्रीम कोर्ट को लेकर की गई टिप्पणी ने देश में राजनीतिक उबाल ला दिया है। दुबे ने सुप्रीम कोर्ट पर धार्मिक युद्ध भड़काने का आरोप लगाया था और यहां तक कह दिया था कि अगर ऐसा चलता रहा तो संसद को बंद कर देना चाहिए।