रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने कैबिनेट की बैठक में बड़ा संदेश दिया है। सत्ता के पारंपरिक ढर्रे से अलग साय सरकार ने विकास के विकेंद्रीकरण को मूल मंत्र बनाते हुए राज्य के सुदूर आदिवासी अंचलों से लेकर मैदानी इलाकों तक बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण की व्यापक रूपरेखा तैयार की है। इस रणनीतिक फैसले का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश यह है कि विकास की बयार किसी राजनीतिक दल के प्रभाव क्षेत्र या चुनावी गणित तक सीमित नहीं रहेगी। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य की हर विधानसभा और हर वर्ग तक प्रशासनिक संसाधनों और बुनियादी सुविधाओं की पहुंच समान रूप से सुनिश्चित की जाएगी। यह कदम राज्य के समावेशी विकास को गति देने के साथ ही साय सरकार की प्रशासनिक दूरदर्शिता और सामाजिक सरोकारों को भी उजागर करता है।

आदिवासी अंचलों में मजबूत होती प्रशासनिक और सामाजिक संरचना

कैबिनेट के फैसलों में छत्तीसगढ़ के दूरस्थ आदिवासी बाहुल्य और वनांचल क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। जशपुर में पुलिस लाइन और रणजीता स्टेडियम के पीछे की शासकीय भूमि के कायाकल्प से लेकर बलरामपुर- रामानुजगंज जिले के सीमांत क्षेत्र में स्थित वेटनरी हॉस्पिटल कैंपस के व्यवस्थित पुनर्विकास तक, सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक विकास का ढांचा पहुंचेगा। आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक परिसंपत्तियों के इस सुनियोजित विकास से न केवल स्थानीय स्तर पर नागरिक सुविधाएं सुदृढ़ होंगी, बल्कि इन इलाकों के निवासियों में सरकार के प्रति भरोसा भी प्रगाढ़ होगा। सुदूर अंचलों को मुख्यधारा के विकास मॉडल से जोड़ना साय सरकार का एक बेहद प्रभावी और दूरगामी फैसला माना जा रहा है।

विधानसभा अध्यक्ष के क्षेत्र से लेकर कांग्रेस के प्रभाव वाले गढ़ों तक समान न्याय

इस नीतिगत निर्णय का सबसे दिलचस्प राजनीतिक पहलू विकास का संतुलित वितरण है। एक तरफ जहां पूर्व मुख्यमंत्री व वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के क्षेत्र राजनांदगांव को बड़े औद्योगिक और भंडारण प्रोजेक्ट्स की सौगात दी गई है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल कांग्रेस के वर्चस्व और प्रभाव वाले राजनीतिक क्षेत्रों जैसे दुर्ग, सक्ती, धमतरी और रामानुजगंज में भी पुनर्विकास की बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। सक्ती के बुधवारी बाजार, धमतरी के रुद्री चौक और दुर्ग के शासकीय पोल्ट्री फार्म जैसे शहरी एवं अर्द्ध-शहरी केंद्रों में जर्जर परिसंपत्तियों का नए सिरे से कायाकल्प किया जाएगा। किसी भी क्षेत्र के साथ राजनीतिक भेदभाव न करते हुए सभी इलाकों को बराबर का भागीदार बनाना यह साबित करता है कि सरकार चुनावी प्रतिस्पर्धा से ऊपर उठकर पूरे प्रदेश को एक समान नजरिए से देख रही है।

पीपीपी मॉडल से खजाने पर बोझ डाले बिना परिसंपत्तियों का कायाकल्प

रिडेवलपमेंट योजना के द्वितीय चरण के अंतर्गत स्वीकृत की गई इन 5 प्रमुख परियोजनाओं की सबसे बड़ी खासियत इनका कार्यान्वयन मॉडल है। सरकार ने इन सभी जीर्ण- शीर्ण सरकारी परिसंपत्तियों के नए सिरे से सुनियोजित निर्माण के लिए सार्वजनिक- निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल को अपनाने का फैसला किया है। सार्वजनिक निजी सहभागिता के इस प्रयोग से राज्य सरकार के वित्तीय खजाने पर बिना कोई अतिरिक्त आर्थिक दबाव डाले आधुनिक शासकीय ढांचा तैयार होगा। इससे न केवल अनुपयोगी पड़ी सरकारी जमीनों का बेहतर और व्यावसायिक इस्तेमाल संभव हो सकेगा, बल्कि राज्य के राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी और स्थानीय स्तर पर व्यापार, निर्माण तथा सेवा क्षेत्रों में नए रोजगार के अवसरों का सृजन होगा।

राजनांदगांव में एग्रो-प्रोसेसिंग और स्टोरेज हब से बदलेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था

कृषि और सम्बद्ध क्षेत्रों को मजबूत करने के लिए राजनांदगांव जिले में दो बेहद महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को मंजूरी देकर सरकार ने पूरे मध्य छत्तीसगढ़ के लिए समृद्धि का नया द्वार खोला है। ग्राम सोमनी में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के माध्यम से लगभग 400 करोड़ रुपये के बड़े निवेश से मल्टी फ्रूट प्रोसेसिंग फैसिलिटी स्थापित की जाएगी। इसके लिए राजगामी संपदा की 31.55 एकड़ भूमि आवंटित की गई है, जिससे किसानों से सीधे फल- सब्जियों की खरीदी की पारदर्शी व्यवस्था बनेगी। इस विशाल परियोजना से 1,000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष तथा 5,000 से अधिक युवाओं को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। इसके साथ ही खपरीकला में केंद्रीय भंडारण निगम को 10 एकड़ जमीन देकर आधुनिक भंडारण इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया जा रहा है, जिससे फसलों के सुरक्षित रखरखाव की क्षमता बढ़ेगी और किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिल सकेगा।

विकास के नए अध्याय से मजबूत होती राज्य की राजनीतिक और सामाजिक स्थिरता

साय कैबिनेट के ये तमाम फैसले केवल कागजी योजनाएं नहीं हैं, बल्कि ये छत्तीसगढ़ के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य को लंबे समय तक प्रभावित करने वाले दूरगामी कदम हैं। विकास का यह मॉडल राजनीतिक तटस्थता, बजटीय अनुशासन और स्थानीय आवश्यकताओं के सटीक आकलन पर आधारित है। विरोधी दलों के प्रभाव वाले क्षेत्रों में विकास योजनाओं को पूरी गति से आगे बढ़ाकर सरकार ने विपक्ष के भेदभाव वाले पारंपरिक आरोपों की हवा निकाल दी है। वहीं दूसरी ओर, कृषि प्रसंस्करण, बुनियादी ढांचे के पुनर्विकास और रोजगार सृजन का यह समन्वित प्रयास राज्य में आर्थिक स्थिरता लाएगा। कुल मिलाकर, साय सरकार ने यह साबित कर दिया है कि संतुलित विकास ही राज्य की राजनीतिक स्थिरता और जन-विश्वास को बनाए रखने का सबसे सशक्त माध्यम है।