रायपुर। मंत्रिमंडल की मैराथन बैठक में साय सरकार ने धान माफिया और बिचौलियों के गठजोड़ को जड़ से खत्म करने के उद्देश्य से चालू खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। नई व्यवस्था के तहत अब राज्य के 27.50 लाख से अधिक पंजीकृत किसानों को प्रति एकड़ 21 क्विंटल के तय मानक के आधार पर सीधी आर्थिक सुरक्षा का लाभ दिया जाएगा। यदि किसी किसान के खेत में पैदावार कम भी होती है, तब भी उसे अतिरिक्त धान जुटाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। किसान जितनी भी उपज उपार्जन केंद्र लाएगा, उसे उसका भुगतान मिलेगा ही, साथ ही 21 क्विंटल के कोटे में से बची हुई मात्रा की बोनस राशि भी उसके बैंक खाते में सीधे ट्रांसफर कर दी जाएगी।

बस्तर और सरगुजा के वनांचल व पहाड़ी किसानों को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ

सरकार का यह नीतिगत बदलाव विशेष रूप से बस्तर और सरगुजा संभाग के दूरस्थ, पहाड़ी तथा असिंचित क्षेत्रों के किसानों के लिए वरदान साबित होगा। इन भौगोलिक इलाकों में सिंचाई संसाधनों की सीमा और पथरीली या हल्की मिट्टी के कारण प्रति एकड़ औसतन 12 से 15 क्विंटल ही धान की उपज हो पाती है। पुरानी व्यवस्था में 21 क्विंटल प्रति एकड़ की पूरी बोनस राशि हासिल करने के लिए इन क्षेत्रों के किसानों को बाहरी व्यापारियों या बिचौलियों से 2300 से 2400 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदना पड़ता था। परिवहन और खरीदी केंद्र के खर्चों के बाद किसानों के हाथ में नाममात्र का लाभ बचता था, जबकि बड़ा मुनाफा दलाल कमा ले जाते थे। अब स्वत: बोनस मिलने से बस्तर और सरगुजा के छोटे व सीमांत किसानों की आय बिना किसी अतिरिक्त लागत के सुरक्षित हो गई है।

नीतिगत निर्णय के पीछे की वजह और इसका व्यापक राजनीतिक मायने

साय सरकार द्वारा धान खरीदी की व्यवस्था में यह बदलाव लाने के पीछे दो मुख्य कारण हैं—पहला, वास्तविक अन्नदाता को दलालों के शोषण से मुक्त कराना और दूसरा, राज्य के बाहर से आने वाले अवैध धान तथा कागजी री-साइक्लिंग पर पूरी तरह से नकेल कसना। अगर इसके राजनीतिक निहितार्थों को समझें तो यह फैसला छत्तीसगढ़ के ग्रामीण वोट बैंक और खासकर आदिवासी बहुल बस्तर-सरगुजा संभाग में सत्ता पक्ष की पकड़ को बेहद मजबूत करेगा। पूर्ववर्ती राजनीतिक व्यवस्थाओं में राइस मिलरों और बिचौलियों का जो समानांतर नेटवर्क खड़ा हो गया था, यह निर्णय उस पर करारा प्रहार है। सरकार ने इसके जरिए संदेश दिया है कि सरकारी खजाने का पैसा मध्यस्थों की जेब में जाने के बजाय सीधे जरूरतमंद किसान के खाते में पहुंचेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और सरकार की पारदर्शी छवि जनता के बीच और सुदृढ़ होगी।

बिचौलियों और राइस मिलरों की साठगांठ ध्वस्त

बैठक में रेखांकित किया गया कि पूर्व की व्यवस्था में वास्तविक पैदावार कम होने पर किसान बोनस का पूरा लाभ पाने के लिए बिचौलियों के पास जाने पर मजबूर होते थे। दलाल बाहर से कम दाम में धान लाकर समितियों में सरकारी रेट पर खपाते थे, जिसमें किसान को सिर्फ 400 से 500 रुपये का मामूली हिस्सा मिलता था और मुख्य कमाई बिचौलिए कर जाते थे। नई नीति से बाहर से धान लाने और समितियों में फर्जी बिलिंग कराने का पूरा खेल खत्म हो गया है। इसके साथ ही उपार्जन केंद्रों से उठाए गए धान को दोबारा घुमाकर मंडियों में बेचने की अवैध री-साइक्लिंग प्रक्रिया पर भी पूरी तरह से विराम लग गया है।

सरकारी खजाने को करीब 12 हजार करोड़ रुपये की संभावित बचत

प्रशासनिक कसावट और डिजिटल निगरानी के चलते चालू वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार को वित्तीय मोर्चे पर भी बड़ी सफलता मिलती दिख रही है। फर्जी रकबे और अवैध आवक पर रोक लगने से खरीदी का आंकड़ा वास्तविक स्तर पर आ रहा है। खरीफ वर्ष 2023-24 में 144.92 लाख मीट्रिक टन और 2024-25 में 149.00 लाख मीट्रिक टन की रिकॉर्ड खरीदी हुई थी। इसके बाद कड़े नियमों से वर्ष 2025-26 में उपार्जन घटकर 141 लाख मीट्रिक टन रहा, जिससे करीब 5 हजार करोड़ रुपये की बचत हुई थी। इस बार बिचौलियों के पूरी तरह बेदखल होने से वास्तविक खरीदी लगभग 125 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जिससे राज्य के खजाने को करीब 12 हजार करोड़ रुपये की सीधी बचत होगी, जिसे विकास कार्यों में लगाया जाएगा।

कृषक उन्नति योजना का पुनर्गठन और फसल विविधीकरण को बढ़ावा

मंत्रिपरिषद ने ‘कृषक उन्नति योजना’ के ढांचे में संशोधन को मंजूरी देते हुए आदान सहायता राशि का निर्धारण प्रति क्विंटल की जगह अब प्रति एकड़ के मान से कर दिया है। सरकार का मानना है कि इस कदम से किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और वे धान के अलावा अन्य दलहनी, तिलहनी तथा व्यावसायिक फसलों की खेती के प्रति आकर्षित होंगे। खाते में सुनिश्चित राशि आने से किसान उन्नत बीज, उर्वरक, आधुनिक कीटनाशक, कृषि यंत्रीकरण और ड्रिप इरीगेशन जैसी उन्नत तकनीकों को अपनाने में सक्षम होंगे, जिससे आने वाले समय में प्रदेश में प्रति एकड़ कृषि उत्पादकता में भारी सुधार आएगा।

केंद्रीय समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी और 3100 रुपये का कुल भुगतान

केंद्र सरकार ने चालू सीजन के लिए सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर 2,441 रुपये और ग्रेड-ए धान का 2,461 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जो पिछले वर्ष से 72 रुपये प्रति क्विंटल अधिक है। केंद्र द्वारा बढ़ाए गए इस समर्थन मूल्य में राज्य सरकार अपनी ‘कृषक उन्नति योजना’ की आदान सहायता जोड़कर छत्तीसगढ़ के किसानों को कुल 3100 रुपये प्रति क्विंटल का भाव देना सुनिश्चित कर रही है।

डिजिटल व्यवस्था और बीते वर्ष का पंजीयन पूरी तरह मान्य

किसानों की सहूलियत के लिए सरकार ने एग्रीस्टेक आईडी से जुड़े पिछले वर्ष के सभी पंजीकृत किसानों को बिना किसी नए झंझट के इस बार भी सीधे मान्य कर दिया है, जिससे उन्हें बार-बार दफ्तरों के चक्कर काटने और ऋण पुस्तिका जमा करने से आजादी मिल गई है। उपग्रह आधारित डिजिटल क्रॉप सर्वे से बोए गए रकबे का एकदम सटीक ऑनलाइन आकलन किया गया है। उपार्जन केंद्रों पर बायोमैट्रिक सत्यापन से केवल वास्तविक किसान ही धान बेच सकेंगे। साथ ही, भीड़ से बचाने के लिए 360 नए केंद्र खोलकर अब कुल 3,100 केंद्रों के माध्यम से खरीदी संपन्न की जाएगी।