जनदर्शन में खुलीं जमीनी सच्चाइयाँ: “मैं जिंदा हूं…” से लेकर पानी-मुआवजे तक की पुकार, हर फरियाद पर कलेक्टर की सीधी सुनवाई
जनदर्शन बना लोगों की पीड़ा का आईना: कहीं ‘मैं जिंदा हूं’, तो कहीं पानी-मुआवजे की पुकार

बिलासपुर… मंथन सभा कक्ष में लगा साप्ताहिक जनदर्शन इस बार फाइलों से ज्यादा चेहरों की कहानी कहता नजर आया। यहां पहुंचे लोग सिर्फ आवेदन लेकर नहीं आए थे, बल्कि अपने साथ वे परेशानियां भी लाए थे, जो महीनों-सालों से उनके जीवन को प्रभावित कर रही हैं।
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने एक-एक आवेदक की बात ध्यान से सुनी। कई मामलों में उन्होंने तत्काल संबंधित विभागों को सक्रिय किया, तो कुछ प्रकरणों को चिन्हित कर उनकी प्राथमिकता तय करवाई। इस दौरान नगर निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे और जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल भी मौजूद रहे।
सबसे ज्यादा चर्चा में जरहाभाठा की अमीना बेगम रहीं, जिनकी बात सुनकर माहौल कुछ पल के लिए थम सा गया। उन्होंने कहा— “मैं जिंदा हूं, लेकिन कागजों में मुझे मृत बता दिया गया… पेंशन बंद हो गई है।” कलेक्टर ने तुरंत इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कराने को कहा।
इसी बीच मस्तुरी के बेलपान गांव से आए ग्रामीणों ने पानी के संकट की तस्वीर रखी। उनका आरोप था कि एक इस्पात कंपनी द्वारा भूजल का लगातार दोहन किया जा रहा है, जिससे गांव में जलस्तर गिर गया है। कलेक्टर ने इस शिकायत को जांच के दायरे में लेते हुए स्थिति स्पष्ट करने को कहा।
मस्तुरी के ही पोड़ी गांव के किसानों ने वर्षों से लंबित मुआवजे का मुद्दा उठाया। करीब 40 किसानों ने बताया कि जलाशय चौड़ीकरण के लिए जमीन ली गई, लेकिन मुआवजा आज तक नहीं मिला। इस मामले को संबंधित शाखा तक पहुंचाकर प्राथमिकता से देखने को कहा गया।
जनदर्शन में पहुंचे करीब 150 सुरक्षा गार्डों ने दो महीने से वेतन नहीं मिलने की समस्या रखी। उन्होंने बताया कि ड्यूटी नियमित है, लेकिन भुगतान अटका हुआ है। इस पर संबंधित विभाग को स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा गया।
ग्राम खैरखुड़ी की संयोगिता भारद्वाज ने विधवा पेंशन और योजना का लाभ नहीं मिलने की बात रखी, जबकि गढ़वट के एवसराम कश्यप ने अपने लिए मोटराइज्ड ट्रायसायकल की मांग की। दोनों मामलों को भी आगे की प्रक्रिया के लिए संबंधित विभागों तक भेजा गया।
पाली नवाडीह के ग्रामीणों ने बस्ती के बीच लगे बिजली खंभों को लेकर चिंता जताई। उनका कहना था कि इससे हादसे का खतरा बना हुआ है। इस विषय को दर्ज कर अगली समीक्षा में जवाब मांगा गया है।
जनदर्शन में अवैध कब्जा, सीमांकन और योजनाओं से जुड़े कई आवेदन आए। हर आवेदन के पीछे एक अलग कहानी थी—कहीं पानी की, कहीं हक की, तो कहीं पहचान की।





