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Bilaspur

साइंस कॉलेज मैदान पर साफ आदेश: खेल पहले, मेला नहीं

खेल के आगे कारोबार हारा: फन फेयर को नहीं मिली इजाजत

बिलासपुर…शहर के साइंस कॉलेज मैदान को लेकर चला विवाद अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। जहां एक तरफ व्यावसायिक आयोजनों के लिए मैदान के उपयोग की तैयारी थी, वहीं दूसरी ओर छात्रों और खिलाड़ियों के हित का सवाल खड़ा हुआ। अंततः प्रशासन ने साफ रुख अपनाते हुए प्रस्तावित फन फेयर आयोजन की अनुमति निरस्त कर दी है।

मैदान का चरित्र बदला, सवाल उठे

शासकीय ई. राघवेंद्र राव स्नातकोत्तर विज्ञान महाविद्यालय का खेल मैदान पिछले कुछ समय से व्यावसायिक और सार्वजनिक आयोजनों के लिए इस्तेमाल हो रहा था। इससे नियमित अभ्यास, प्रशिक्षण और खेल गतिविधियां प्रभावित हो रही थीं। यही वह बिंदु था, जहां से विरोध की आवाज उठी।

मुद्दा उठा, दबाव बना, फाइल चली

कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने इस पूरे मामले को औपचारिक रूप से उठाया। कलेक्टर को लिखे पत्र में उन्होंने साफ कहा—खेल मैदान का उपयोग केवल खेल और छात्र विकास के लिए होना चाहिए, न कि मेले और व्यापारिक आयोजनों के लिए। इसके बाद महाविद्यालय प्रशासन ने भी स्थिति स्पष्ट करते हुए कलेक्टर से मार्गदर्शन मांगा।

फन फेयर पर ब्रेक, आदेश में स्पष्ट संदेश

30 अप्रैल से 8 जून तक प्रस्तावित फन फेयर अम्यूजमेंट पार्क मेला अब नहीं लगेगा। झूले, स्टॉल और मनोरंजन गतिविधियों से भरे इस आयोजन को प्रशासन ने अनुमति देने से इंकार कर दिया। आदेश में दो टूक कहा गया—मैदान का उपयोग केवल शैक्षणिक और खेल गतिविधियों के लिए ही होगा, व्यावसायिक आयोजन इसके दायरे में नहीं आते।

निर्णय के पीछे क्या बदला?

यह केवल एक आवेदन खारिज होने की कहानी नहीं है। यह उस प्रशासनिक स्पष्टता का संकेत है, जहां “उपयोग” और “दुरुपयोग” के बीच की रेखा तय की गई। मैदान को राजस्व का स्रोत मानने की प्रवृत्ति पर रोक लगी है।

जमीन पर असर क्या होगा?

इस फैसले का सीधा असर छात्रों और खिलाड़ियों पर पड़ेगा। अब उन्हें अभ्यास के लिए निर्बाध समय और स्थान मिलेगा। लगातार बाधित हो रही खेल गतिविधियों को स्थिरता मिलने की उम्मीद है।

बड़ा सवाल अब भी बाकी

यह फैसला एक मिसाल जरूर है, लेकिन सवाल यहीं खत्म नहीं होता—क्या जिले के अन्य शैक्षणिक संस्थानों के मैदान भी इसी मानक पर परखे जाएंगे? या यह कार्रवाई सिर्फ एक मामले तक सीमित रह जाए

 मैदान खेल के लिए, कारोबार के लिए नहीं

अंकित गौरहा ने फैसले के बाद कहा कि खेल मैदान युवाओं के भविष्य का आधार हैं, इन्हें व्यावसायिक आयोजनों में देना छात्रों के साथ अन्याय है। बयान अपनी जगह है, लेकिन अब नजर इस बात पर रहेगी कि इस सिद्धांत का पालन जमीन पर कितनी सख्ती से होता है।

Bhaskar Mishra

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 16 साल का अनुभव।विभिन्न माध्यमों से पत्रकारिता के क्षेत्र मे काम करने का अवसर मिला।यह प्रयोग अब भी जारी है।कॉलेज लाइफ के दौरान से पत्रकारिता से गहरा जुड़ाव हुआ।इसी दौरान दैनिक समय से जुडने का अवसर मिला।कहानी,कविता में विशेष दिलचस्पी ने पहले तो अधकचरा पत्रकार बनाया बाद में प्रदेश के वरिष्ठ और प्रणम्य लोगों के मार्गदर्शन में संपूर्ण पत्रकारिता की शिक्षा मिली। बिलासपुर में डिग्री लेने के दौरान दैनिक भास्कर से जु़ड़ा।2005-08 मे दैनिक हरिभूमि में उप संपादकीय कार्य किया।टूडे न्यूज,देशबन्धु और नवभारत के लिए रिपोर्टिंग की।2008- 11 के बीच ईटीवी हैदराबाद में संपादकीय कार्य को अंजाम दिया।भाग दौड़ के दौरान अन्य चैनलों से भी जुडने का अवसर मिला।2011-13 मे बिलासपुर के स्थानीय चैनल ग्रैण्ड न्यूज में संपादन का कार्य किया।2013 से 15 तक राष्ट्रीय न्यूज एक्सप्रेस चैनल में बिलासपुर संभाग व्यूरो चीफ के जिम्मेदारियों को निभाया। 1998-2000 के बीच आकाशवाणी में एनाउँसर-कम-कम्पियर का काम किया।वर्तमान में www.cgwall.com वेबपोर्टल में संपादकीय कार्य कर रहा हूं।
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