नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई: तीन आरोपियों को 10-10 वर्ष की सजा, पुलिस की एंड-टू-एंड जांच बनी मिसाल

सूरजपुर ।जिले में नशे के कारोबार के खिलाफ पुलिस की सख्त कार्रवाई लगातार असर दिखा रही है। जब से पुलिस कप्तान प्रशांत ठाकुर ने पद भार संभाला है, तब से मामलों में एंड-टू-एंड कार्रवाई सूचना संकलन से लेकर न्यायालय में प्रभावी पैरवी तक पर विशेष फोकस किया जा रहा है, जिसके चलते दोष सिद्धि के मामलों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
घटनाक्रम के अनुसार, 7 फरवरी 2025 को चौकी लटोरी पुलिस को मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि ग्राम तुलसी नाला के पास कुछ व्यक्ति अवैध नशीली दवाइयों के साथ मौजूद हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम ने तत्काल घेराबंदी कर मौके से विकास सिंह राणा (30 वर्ष), सूरज सिंह (20 वर्ष) एवं आशीष सिंह उर्फ गोलू (30 वर्ष) निवासी ग्राम केनाबांध, थाना कोतवाली अम्बिकापुर को एक विधि विरुद्ध संघर्षरत बालक के साथ पकड़ा।
तलाशी के दौरान आरोपियों के कब्जे से ऑनरेक्स कफ सिरप की 1000 शीशियां बरामद की गई। पुलिस ने मौके पर ही विधिवत जप्ती कार्यवाही करते हुए पंचनामा तैयार किया और प्रकरण दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार किया। मामले में एक नाबालिग होने के कारण उसे विधि अनुसार किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
प्रकरण की जांच एएसआई अरुण गुप्ता की ओर से की गई, जिन्होंने साक्ष्यों का वैज्ञानिक एवं कानूनी आधार पर संकलन किया। जप्त पदार्थ को फॉरेंसिक परीक्षण हेतु प्रयोगशाला भेजा गया, जहां से प्राप्त रिपोर्ट ने नशीले पदार्थ होने की पुष्टि की। साथ ही गवाहों के बयान, जब्ती प्रक्रिया एवं अन्य तकनीकी साक्ष्यों को सुदृढ़ करते हुए न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया।
मामले की सुनवाई माननीय विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस एक्ट) न्यायालय सूरजपुर में हुई। न्यायालय द्वारा गवाहों के कथन, एफएसएल रिपोर्ट एवं समस्त साक्ष्यों के परीक्षण के उपरांत आरोपियों को दोषी पाया गया। 17 अप्रैल 2026 को पारित निर्णय में तीनों आरोपियों को NDPS Act, 1985 की धारा 21(सी) के तहत 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 1-1 लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया।
इस पूरे प्रकरण में पुलिस की त्वरित कार्रवाई, सटीक विवेचना और न्यायालय में प्रभावी प्रस्तुतीकरण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि जांच एंड-टू-एंड मजबूत हो, तो नशे के कारोबार में लिप्त आरोपियों को कानून के दायरे में लाकर कड़ी सजा दिलाई जा सकती है। इस तरह के सख्त निर्णयों और पुलिस की सुदृढ़ कार्रवाई का सीधा संदेश समाज में जाता है कि ऐसे अवैध कार्यों में संलिप्त या इसमें शामिल होने की सोच रखने वाले लोग अंजाम को समझते हुए इस प्रकार की गतिविधियों से दूर रहने के लिए बाध्य होंगे।





