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Bilaspur

सेंट जेवियर्स ग्रुप पर शिकंजा: जांच के आदेश, 20 किमी दूर स्कूल विलय पर हाईकोर्ट की रोक

मान्यता उल्लंघन, फीस और किताबों पर शिकायतें; न्यायपालिका ने भी छात्रों के हित में खींची सख्त रेखा

बिलासपुर…निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर उठते सवालों के बीच सेंट जेवियर्स स्कूल ग्रुप अब प्रशासन और न्यायपालिका दोनों के रडार पर आ गया है। मान्यता नियमों के उल्लंघन, बोर्ड परीक्षाओं में विद्यार्थियों को शामिल न कराने, निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें थोपने और फीस वसूली में अनियमितताओं के आरोपों पर जिला शिक्षा अधिकारी ने जांच के आदेश जारी किए हैं। यह कार्रवाई उस शिकायत के आधार पर शुरू हुई है, जिसमें स्कूल प्रबंधन पर नियमों की अनदेखी कर छात्रों के हितों से समझौता करने के आरोप लगाए गए हैं।

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के आदेश के तहत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सरकंडा के प्राचार्य पी. मंडल और चांटीडीह के प्राचार्य सुनील कौशिक को जांच की जिम्मेदारी दी गई है। दोनों को निर्देश दिया गया है कि सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच कर एक सप्ताह के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करें। आदेश की प्रतिलिपि कलेक्टर, संयुक्त संचालक शिक्षा और संबंधित स्कूल प्रबंधन तक भेजी जा चुकी है, जिससे यह स्पष्ट है कि मामला अब प्रशासनिक निगरानी में गंभीरता से लिया जा रहा है।

शिकायत में उठाए गए आरोप केवल प्रक्रियात्मक खामियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य से जुड़े हैं। ऐसे में यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो स्कूल की मान्यता रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई भी संभव है। जिले में निजी स्कूलों के खिलाफ लगातार सामने आ रही शिकायतों ने अभिभावकों के बीच असंतोष को और गहरा किया है।

इसी बीच, सेंट जेवियर स्कूल से जुड़े एक अन्य मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने भी स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया है। रानीसागर, कोटा ब्लॉक स्थित स्कूल को भरनी, तखतपुर ब्लॉक के स्कूल में विलय करने के प्रस्ताव को अदालत ने खारिज कर दिया। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि दोनों स्कूल अलग-अलग विकास खंडों में स्थित हैं, उनके बीच लगभग 20 किलोमीटर की दूरी है और उनकी मान्यता व प्रबंधन भी अलग-अलग हैं। इस स्थिति में छात्रों को दूरस्थ निजी स्कूल में स्थानांतरित करना नियमों के अनुरूप नहीं है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई निजी स्कूल बंद होता है, तो विद्यार्थियों को नजदीकी सरकारी स्कूलों में स्थानांतरित करना ही उचित प्रक्रिया है। साथ ही, हस्तक्षेप करने वाले अभिभावकों को यह स्वतंत्रता दी गई है कि वे शिक्षा विभाग के 16 अप्रैल 2026 के आदेश से असंतुष्ट होने पर सक्षम कानूनी मंच पर चुनौती दे सकते हैं।

प्रशासनिक जांच और न्यायिक हस्तक्षेप के ये समानांतर घटनाक्रम यह संकेत दे रहे हैं कि जिले में निजी स्कूलों की मनमानी पर अब सख्ती की शुरुआत हो चुकी है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर लिए जाने वाले फैसले न केवल इस मामले की दिशा तय करेंगे, बल्कि पूरे निजी शिक्षा तंत्र पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।

Bhaskar Mishra

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 16 साल का अनुभव।विभिन्न माध्यमों से पत्रकारिता के क्षेत्र मे काम करने का अवसर मिला।यह प्रयोग अब भी जारी है।कॉलेज लाइफ के दौरान से पत्रकारिता से गहरा जुड़ाव हुआ।इसी दौरान दैनिक समय से जुडने का अवसर मिला।कहानी,कविता में विशेष दिलचस्पी ने पहले तो अधकचरा पत्रकार बनाया बाद में प्रदेश के वरिष्ठ और प्रणम्य लोगों के मार्गदर्शन में संपूर्ण पत्रकारिता की शिक्षा मिली। बिलासपुर में डिग्री लेने के दौरान दैनिक भास्कर से जु़ड़ा।2005-08 मे दैनिक हरिभूमि में उप संपादकीय कार्य किया।टूडे न्यूज,देशबन्धु और नवभारत के लिए रिपोर्टिंग की।2008- 11 के बीच ईटीवी हैदराबाद में संपादकीय कार्य को अंजाम दिया।भाग दौड़ के दौरान अन्य चैनलों से भी जुडने का अवसर मिला।2011-13 मे बिलासपुर के स्थानीय चैनल ग्रैण्ड न्यूज में संपादन का कार्य किया।2013 से 15 तक राष्ट्रीय न्यूज एक्सप्रेस चैनल में बिलासपुर संभाग व्यूरो चीफ के जिम्मेदारियों को निभाया। 1998-2000 के बीच आकाशवाणी में एनाउँसर-कम-कम्पियर का काम किया।वर्तमान में www.cgwall.com वेबपोर्टल में संपादकीय कार्य कर रहा हूं।
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