एसीबी की बड़ी कार्रवाई।…श्वतखोर बीईओ रंगे हाथ धराया: वेतन के बदले 10 हजार की डील, एसीबी का करारा वार
शिक्षा विभाग में हड़कंप संकुल समन्वयक भी फंसा, वेतन रोककर बना रखा था दबाव का जाल

सारंगढ़-बिलाईगढ़:…शिक्षा विभाग में जमी वसूली की परत आखिरकार खुल ही गई। एसीबी बिलासपुर की टीम ने बरमकेला के खंड शिक्षा अधिकारी नरेंद्र जांगड़े को 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ लिया। साथ में संकुल समन्वयक संजय चौहान भी गिरफ्त में आया। कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में हड़कंप है और विभागीय सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
वेतन बना ‘उगाही का हथियार’
मामला पूर्व माध्यमिक शाला झीकीपाली के दो शिक्षकों से जुड़ा है। मार्च महीने का वेतन रोककर दबाव बनाया गया और फिर उसे जारी करने के बदले 5-5 हजार रुपए की मांग रखी गई। शिक्षक निरंजन बरिहा ने इस खेल को उजागर करने का फैसला किया और सीधे एसीबी तक शिकायत पहुंचाई। सत्यापन में मामला सही मिला तो टीम ने जाल बिछाया।
ऑफिस में ही हुई सेटिंग, दराज में पहुंची रिश्वत
योजना के मुताबिक शिक्षक को रकम लेकर बीईओ के कार्यालय भेजा गया। जैसे ही जांगड़े ने 10 हजार रुपए लेकर टेबल के दराज में रखे, पहले से तैनात एसीबी टीम ने दबिश दी और मौके पर ही पकड़ लिया। रिश्वत की पूरी रकम बरामद हुई और दोनों आरोपियों को अभिरक्षा में लिया गया।
सिस्टम में ‘मध्यस्थ’ की भूमिका भी उजागर
जांच में सामने आया कि संकुल समन्वयक संजय चौहान इस पूरी डील में ‘कड़ी’ बना हुआ था। वह शिक्षकों को बीईओ तक रिश्वत पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। यानी वसूली का यह खेल अकेले नहीं, बल्कि नेटवर्क के जरिए चल रहा था।
शिक्षकों में उबाल, कार्रवाई से मिली राहत
बरमकेला ब्लॉक में लंबे समय से बीईओ की कार्यशैली को लेकर नाराजगी थी। शिक्षक संघ के अध्यक्ष देवम प्रकाश पटेल समेत कई शिक्षकों ने इस कार्रवाई को राहत देने वाला कदम बताया। साफ है कि अंदर ही अंदर असंतोष उबल रहा था, जिसे एसीबी की कार्रवाई ने सतह पर ला दिया।
पहली बड़ी कार्रवाई, बड़ा संदेश
बरमकेला क्षेत्र में एसीबी की यह पहली प्रभावी ट्रैप कार्रवाई मानी जा रही है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत केस दर्ज कर आगे की कार्रवाई जारी है। एसीबी ने साफ संदेश दिया है—रिश्वत मांगने वाले बचेंगे नहीं, बस शिकायत सामने आनी चाहिए।





