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Chhattisgarh

लिंगियाडीह बस्ती के राजीव गांधी आश्रय योजना में पैसा जमा करने वाले 36 रहवासियों के घरों और कब्जों को तोड़ने पर हाई कोर्ट ने लगाई रोक

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की जस्टिस एन के चंद्रवंशी वाली एकल पीठ में आज लिंगियाडीह बस्ती के 36 याचिका कर्ताओं को बड़ी राहत देते हुए उनके घरों और कब्जा को तोड़ने पर अंतरिम रोक लगा दी है।

गौरतलब है कि यह सभी याचिका करता 2019-20 में हुए सर्वे के तहत राजीव गांधी आश्रम योजना में पात्र माने गए थे जिसके तहत इन्हें कब्जे वाली जमीन पर ही पट्टा देने का निर्णय राज्य सरकार ने लिया था।

हालांकि 2024 में राज्य सरकार ने अपना निर्णय अमल नहीं किया और अब नगर निगम बिलासपुर ने उस जगह पर व्यावसायिक परिसर और गार्डन बनाने की योजना बनाई है।

आज हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस एन के चंद्रवंशी ने पूर्व में राजीव गांधी आश्चर्य योजना के तहत पैसा लेने के बाद भी पट्टा क्यों नहीं दिया गया इस पर सवाल राज्य सरकार की ओर से उपस्थित अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास और नगर पालिका निगम के अधिवक्ता रणवीर सिंह मरहास से पूछे।

जवाब में अधिवक्ता गणों ने बताया कि 2023 में शासकीय जमीन पर पट्टा देने वाले नियम बदल गए हैं और बदले नियम के अनुसार इन व्यक्तियों को अब वहां पर पट्टा नहीं दिया जा सकता और इसके बदले में इन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत खमतराई इलाके में फ्लैट सिस्टम में एक-एक छोटा मकान दिया जाना प्रस्तावित है।

राज्य सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि राजीव गांधी आश्रय योजना को अब रद्द कर दिया गया है। सरकारी वकीलों ने कब्जे वाली जमीन पर बाजार दुकान लगाने का भी आरोप लगाया।

इसके जवाब में याचिका कर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ,अनिमेष वर्मा ,आशीष बैक,कृष्ण राज मिश्रा ने बताया की 2023 के अधिनियम के पूर्व ही 2019-20 की योजना में उन्हें पात्र मान लिया गया था और वह इसके तहत 2022 में प्रीमियम की राशि भी जमा कर चुके हैं।

ऐसे में 2023 में हुए नियम या कानून में किसी बदलाव से उनके पट्टा लेने के अधिकार पर विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता।

इसके अलावा यह भी कहा गया कि 2023 का अधिनियम भी उनके पट्टा लेने के अधिकार को समाप्त नहीं करता है। लगातार कई दशकों से वहां निवास करने शासन की योजना में चयनित होने और पैसा जमा करने के कारण स्थापित कानून के तहत राज्य सरकार और नगर निगम अपने वादे से अब पीछे नहीं हट सकती।

आज प्रकरण में दो याचिकाओं में से एक याचिका पर नगर निगम का जवाब आने और राज्य सरकार का जवाब अपेक्षित होने तथा दूसरी याचिका में सभी जवाब अपेक्षित होने के तहत सभी पक्षों को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए।

प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाई कोर्ट की एकल पीठ ने इस मामले को विस्तृत रूप से सुनने के योग्य पाया और तब तक अंतरिम राहत के रूप में सभी याचिका कर्ताओं के मकान और कब्जा को ना तोड़ ने का आदेश दिया। मामले की अंतिम सुनवाई हाई कोर्ट के ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद रखी गई है जो कि जून माह में संभावित है।

गौरतलब है कि राजीव गांधी आश्रय योजना में कुल 503 लाभार्थी चयनित हुए थे और उनमें से 113 लाभार्थी के जगह को खाली कर के नगर निगम एक व्यावसायिक परिसर गार्डन बनाना चाहती है।

हालांकि याचिका में लगाए गए आरोप के अनुसार उक्त पूरा क्षेत्र मास्टर प्लान में रिहायशी क्षेत्र है और वहां व्यावसायिक परिसर नहीं बनाया जा सकता। पूर्व में किए गए वादे, राजीव गांधी आश्रय योजना रद्द करने के संबंध में कोई भी आदेश न होने और मास्टर प्लान के विपरीत कार्य को जनहित में ना माने जाने के कारण रिहायशी बस्ती को नहीं तोड़ा जा सकता यह आधार याचिका कर्ताओं ने लिया है।

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