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west asia conflict: मिडिल ईस्ट संकट पर पीएम मोदी का बड़ा कदम, कल मुख्यमंत्रियों के साथ हाई-लेवल बैठक

मिडिल ईस्ट में तीन सप्ताह से जारी इस तनाव पर पीएम मोदी ने संसद के दोनों सदनों में अपनी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संकट न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए अप्रत्याशित चुनौतियां लेकर आया है। प्रधानमंत्री ने कहा, "पश्चिम एशिया के हालात चिंताजनक हैं और भारत के लिए यह युद्ध आर्थिक, राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय—तीनों स्तरों पर बड़ी चुनौती है।"

west asia conflict।दिल्ली: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में गहराते तनाव और युद्ध के हालातों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मोर्चा संभाल लिया है। वैश्विक अस्थिरता के भारत पर पड़ने वाले असर और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा करने के लिए पीएम मोदी 27 मार्च को राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण हाई-लेवल मीटिंग करेंगे। शाम 6:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होने वाली इस बैठक में देश की सुरक्षा, ऊर्जा संकट और सप्लाई चेन जैसे गंभीर मुद्दों पर मंथन होगा।

चुनावी राज्यों के मुख्यमंत्री नहीं होंगे शामिल

​west asia conflict।आचार संहिता लागू होने के कारण चुनावी राज्यों के मुख्यमंत्री इस बैठक का हिस्सा नहीं बन सकेंगे। हालांकि, समन्वय में कोई कमी न रहे, इसके लिए कैबिनेट सचिवालय के माध्यम से इन राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ एक अलग बैठक आयोजित की जाएगी। प्रधानमंत्री की इस पहल को ‘टीम इंडिया’ की भावना के साथ संकट का सामना करने की एक ठोस कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

संसद से लेकर वैश्विक मंच तक पीएम सक्रिय

​मिडिल ईस्ट में तीन सप्ताह से जारी इस तनाव पर पीएम मोदी ने संसद के दोनों सदनों में अपनी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संकट न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए अप्रत्याशित चुनौतियां लेकर आया है। प्रधानमंत्री ने कहा, “पश्चिम एशिया के हालात चिंताजनक हैं और भारत के लिए यह युद्ध आर्थिक, राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय—तीनों स्तरों पर बड़ी चुनौती है।”

भारतीयों की सुरक्षा और तेल-गैस की चिंता

​प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से खाड़ी देशों में रह रहे 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है। युद्ध के कारण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से आवाजाही चुनौतीपूर्ण हो गई है, जिससे भारत का वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की बाधित होती सप्लाई के बीच पीएम मोदी ने देश को आश्वस्त किया है कि भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन का रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व सुरक्षित है। साथ ही, उर्वरकों (फर्टिलाइजर) का भी पर्याप्त भंडार मौजूद है।

सर्वदलीय बैठक में सरकार का भरोसा: ‘पैनिक की जरूरत नहीं’

​इससे पहले गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक सर्वदलीय बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में सरकार ने विपक्षी दलों को आश्वस्त किया कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं है और भारतीय जहाज सुरक्षित मार्गों से निकल रहे हैं।

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