बिलासपुर…शहर में ऑटो से सफर करने वाले यात्रियों के लिए अब चालक की पहचान जानना मुश्किल नहीं होगा। ऑटो में लगे क्यूआर कोड को मोबाइल से स्कैन करते ही यात्री संबंधित ऑटो और चालक की दर्ज जानकारी देख सकेंगे। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर बिलासपुर पुलिस ने सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में डिजिटल पहचान की नई व्यवस्था शुरू की है।

गुरुवार को चेतना भवन पुलिस ग्राउंड में पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज रामगोपाल गर्ग और पुलिस उपमहानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह की मौजूदगी में ऑटो रिक्शा डिजिटल पंजीकरण एवं क्यूआर आधारित नागरिक सुरक्षा व्यवस्था का शुभारंभ हुआ। पहल के पहले ही दिन जिले के 3000 से अधिक ऑटो चालकों ने डिजिटल पंजीयन कराया। कार्यक्रम में जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से बड़ी संख्या में ऑटो चालक पहुंचे। पुलिस के मुताबिक अगले तीन दिनों में जिले के सभी ऑटो को इस व्यवस्था से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

ऑटो पर क्यूआर ,चालक की पहचान

नई व्यवस्था की सबसे अहम कड़ी ऑटो पर लगाया जाने वाला क्यूआर कोड है। यात्री ऑटो में बैठने से पहले इसे अपने मोबाइल से स्कैन कर सकेंगे। इसके जरिए संबंधित वाहन और चालक की दर्ज जानकारी उपलब्ध होगी। पंजीयन के दौरान चालक की पहचान, ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन संबंधी विवरण, फोटो समेत जरूरी जानकारी डिजिटल रिकॉर्ड में सुरक्षित की जाएगी।

इसका सीधा फायदा यह होगा कि किसी यात्री को ऑटो, चालक या यात्रा से जुड़ी जानकारी तत्काल साझा करने की जरूरत पड़े तो डिजिटल पहचान उसके पास उपलब्ध रहेगी। खासकर अकेले सफर करने वाली महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और दूसरे शहरों से बिलासपुर आने वाले यात्रियों के लिए यह व्यवस्था उपयोगी हो सकती है।

सार्वजनिक परिवहन में जवाबदेही की कोशिश

शहर के विस्तार के साथ ऑटो सार्वजनिक परिवहन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। रोज हजारों लोग इनसे सफर करते हैं। ऐसे में चालक और वाहन की पहचान सुनिश्चित करने की यह व्यवस्था सिर्फ तकनीकी पंजीयन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पुलिस और प्रशासन के लिए एक व्यवस्थित डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार करेगी।

पुलिस के अनुसार पंजीकृत वाहनों और चालकों का डिजिटल रिकॉर्ड होने से भविष्य में सत्यापन और आवश्यक कार्रवाई को भी आसान बनाया जा सकेगा। किसी घटना की स्थिति में वाहन और चालक की पहचान तक पहुंचने में यह व्यवस्था मददगार हो सकती है।

आईजी बोले- पुलिस के महत्वपूर्ण सहयोगी

शुभारंभ कार्यक्रम में आईजी रामगोपाल गर्ग ने ऑटो चालकों को पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण सहयोगी बताया। उन्होंने कहा कि ऑटो चालक शहर और जिले के अलग-अलग हिस्सों में लगातार आवाजाही करते हैं। उन्हें स्थानीय इलाकों और वहां की गतिविधियों की जानकारी रहती है। ऐसे में अपराध या किसी संदिग्ध गतिविधि की सूचना पुलिस तक पहुंचाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन में चालक की पहचान स्पष्ट होना जरूरी है, ताकि यात्री बिना किसी संशय के सफर कर सके। क्यूआर आधारित पहचान से यात्रियों और ऑटो चालकों के बीच भरोसा बढ़ाने में मदद मिलेगी।

सभी ऑटो का पंजीयन कराने की तैयारी

यातायात पुलिस ने सभी ऑटो चालकों को तीन दिन के भीतर क्यूआर कोड स्कैन कर अपना डिजिटल पंजीयन कराने की समय-सीमा दी है। इसके लिए शहर और जिले के अलग-अलग चौक-चौराहों पर अभियान चलाकर पंजीयन की व्यवस्था की जाएगी। पुलिस के अनुसार क्यूआर कोड और पंजीयन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि ऑटो चालकों को इसके लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यातायात रामगोपाल करियारे ने कार्यक्रम में योजना की रूपरेखा और उद्देश्य की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि व्यवस्था का लक्ष्य ऑटो और चालक का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के साथ यात्रियों को सत्यापित पहचान उपलब्ध कराना है।

पहले दिन हजारों ऑटो चालक पहुंचे

शुभारंभ कार्यक्रम में पुलिस अधिकारियों के साथ नगर निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे समेत पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहे। एएसपी शहर पंकज पटेल, एएसपी ग्रामीण मधुलिका सिंह, सीएसपी परमेश्वर तिलकवार, तिलेश्वर यादव, सुदीप सरकार, एसडीओपी नूपुर उपाध्याय, डीएसपी शिवचरण परिहार, आरआई भूपेंद्र गुप्ता समेत जिले के विभिन्न थानों के प्रभारी मौजूद रहे। पुलिस के मुताबिक कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से 5000 से अधिक ऑटो चालक पहुंचे।

नगर निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे ने ऑटो चालकों को क्यूआर आधारित पहचान व्यवस्था के साथ ही शहर में ठेला, गुमचा और अन्य छोटे व्यवसाय संचालकों के लिए वेंडर नीति के तहत डिजिटल पहचान व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता बताई।