बिलासपुर… उत्तर बस्तर कांकेर के ग्राम कच्चे स्थित रिजर्व फॉरेस्ट के कम्पार्टमेंट नंबर 608 में दर्ज हजारों पेड़ों के गायब होने का मामला अब हाईकोर्ट के निर्देशों के केंद्र में है। मेसर्स गोदावरी पावर एंड इस्पात लिमिटेड की अरी-डोंगरी आयरन ओर माइंस के विस्तार के लिए डायवर्ट की गई 32.36 हेक्टेयर वनभूमि से जुड़े इस मामले में हाईकोर्ट ने लंबित जांच जल्द पूरी करने और वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने की। राजेश रंगारी की जनहित याचिका में वनभूमि पर पेड़ों की संख्या को लेकर गंभीर विसंगति का मुद्दा उठाया गया था। याचिका के अनुसार वन विभाग के रिकॉर्ड में 20 सेंटीमीटर से अधिक घेरा वाले 11,765 पेड़ दर्ज थे। इनमें से 6,070 पेड़ों की कटाई हो चुकी थी और 5,695 पेड़ मौके पर मौजूद होने चाहिए थे।

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जून 2023 की जांच में सामने आया बड़ा अंतर

मामले ने तब गंभीर रूप लिया, जब जून 2023 में मौके पर हुई जांच में रिकॉर्ड में दर्ज शेष पेड़ों की संख्या और वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर सामने आया। जांच के दौरान मौके पर सिर्फ 712 पेड़ खड़े मिले, जबकि 4,983 पेड़ मौके से गायब पाए गए। इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों के नहीं मिलने को लेकर वन विभाग ने जांच शुरू की।

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राज्य सरकार ने सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया कि पेड़ों की संख्या में सामने आई इस विसंगति की जांच जारी है। 19 नवंबर 2025 को तैयार रिपोर्ट पूर्व रिपोर्ट से मेल नहीं खाई। इसके बाद डीएफओ ने रिपोर्ट पर असहमति दर्ज की और 20 नवंबर को मामले की नए सिरे से जांच के निर्देश दिए। जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए संबंधित अधिकारियों को रिमाइंडर भी जारी किए गए हैं।

दबी लकड़ी पर कंपनी से 3.06 लाख की मांग

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मामले में सड़क निर्माण के दौरान लकड़ी दबाए जाने का मुद्दा भी सामने आया। इस संबंध में कंपनी से लकड़ी की कीमत और जुर्माने के रूप में 3,06,341 रुपये की मांग की गई है। हालांकि पेड़ों के गायब होने से जुड़ी मुख्य विसंगति की जांच अभी निर्णायक स्थिति तक नहीं पहुंची है।

अवैध कटाई मिली तो तय होगी जिम्मेदारी

हाईकोर्ट ने कहा कि वन विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है, इसलिए जनहित याचिका का निपटारा किया जा रहा है। हालांकि अदालत ने अधिकारियों को जांच शीघ्र पूरी कर वास्तविक स्थिति सामने लाने के स्पष्ट निर्देश दिए। यदि जांच में अवैध कटाई या पेड़ों के गायब होने की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारी तय कर कानून के अनुसार कार्रवाई करने को कहा गया है।

अदालत ने शेष वनभूमि की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करने और वनभूमि डायवर्जन की मंजूरी के साथ जुड़ी शर्तों का पालन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। हाईकोर्ट ने पर्यावरणीय क्षति की भरपाई के लिए नियमों के तहत क्षतिपूरक और सुधारात्मक पौधरोपण की जरूरत बताई। प्रभावित क्षेत्र में जितने पेड़ नष्ट या गायब हुए हैं, उससे अधिक संख्या में पौधे लगाने की पहल की अपेक्षा भी अदालत ने जताई।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता समरथ सिंह मरहास, केंद्र सरकार की ओर से अन्नपूर्णा तिवारी तथा राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता पी.के. दास ने पैरवी की।