बिलासपुर/रायपुर…छत्तीसगढ़ में मितानिनों ने एक बार फिर अपनी पुरानी मांगों को लेकर आवाज बुलंद कर दी है। उन्होंने साफ कहा है कि अगर सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो वे आंदोलन को और व्यापक स्वरूप देंगी।

मितानिनों की प्रमुख मांगें

ठेका प्रथा का अंत: वर्तमान में मितानिन कार्यक्रम का संचालन एक एनजीओ के माध्यम से किया जा रहा है। मितानिनों का कहना है कि इसे हटाकर सीधे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत लाया जाए।

संविलियन: मितानिनों ने अपनी सेवाओं को राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग में संविलियन करने की मांग दोहराई है। उनका कहना है कि वर्षों से基层 स्वास्थ्य सेवा में योगदान देने के बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला।

आंदोलन की चेतावनी

मितानिनों ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, वे अपना आंदोलन जारी रखेंगी। उनका कहना है कि वे अपनी आवाज रायपुर तक जरूर पहुंचाएंगी, भले ही उन्हें रास्ते में टोल नाकों पर धरना क्यों न देना पड़े।

सरकार पर दबाव

राजधानी रायपुर तक आंदोलन ले जाने की चेतावनी से सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर दबाव बढ़ता दिख रहा है। मितानिनों का कहना है कि वे पीछे हटने वाली नहीं हैं और इस बार आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार हैंl