तराजू पर बचपन का भविष्य: वजन उत्सव में खुली बच्चों की सेहत की असल तस्वीर
कुपोषण पर निर्णायक वार: हर बच्चे की सेहत का हिसाब लेने उतरा विभाग

रामानुजगंज (पृथ्वी लाल केशरी)…बचपन के पोषण स्तर को लेकर सजगता अब केवल कागज़ी आंकड़ों तक सीमित नहीं रही। महिला एवं बाल विकास विभाग ने आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से वजन त्यौहार आयोजित कर 0 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की वृद्धि की वास्तविक स्थिति का आकलन किया।
इस अभियान के तहत बच्चों का वजन और ऊंचाई मापकर आयु के अनुरूप विकास की तुलना वृद्धि चार्ट से की गई। जिन बच्चों में वजन की कमी या वृद्धि में रुकावट पाई गई, उन्हें चिन्हांकित कर विशेष निगरानी सूची में शामिल किया गया।
आंकड़ों से आगे की पहल
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल वजन दर्ज करना नहीं, बल्कि कुपोषण की प्रारंभिक पहचान कर समय रहते हस्तक्षेप करना है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, नियमित वृद्धि मॉनिटरिंग से उन बच्चों की पहचान संभव है जो सामान्य दिखने के बावजूद पोषण की कमी से जूझ रहे होते हैं।
कम वजन वाले बच्चों के अभिभावकों को संतुलित आहार, घर में उपलब्ध स्थानीय खाद्य पदार्थों के पोषण मूल्य, स्वच्छता, स्तनपान और अनुपूरक आहार की सही जानकारी दी गई। आवश्यकतानुसार स्वास्थ्य जांच और अतिरिक्त पोषण आहार की सलाह भी दी गई।
कुपोषण उन्मूलन की रणनीति
विशेषज्ञ मानते हैं कि कुपोषण केवल भोजन की कमी नहीं, बल्कि जागरूकता की कमी का भी परिणाम है। ऐसे में वजन त्यौहार जैसे कार्यक्रम सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से व्यवहार परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और पर्यवेक्षकों ने घर-घर संपर्क कर माताओं को बच्चों की नियमित वृद्धि जांच के महत्व से अवगत कराया। इससे पोषण सुधार की दिशा में निरंतर निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
सामुदायिक भागीदारी
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों की उपस्थिति ने इसे जन-अभियान का रूप दिया। पार्षद सुरेश पुरी, प्रतीक सिंह, पूर्व पार्षद ललित कश्यप, सुपरवाइजर सुशील सिंह सहित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मातेश्वरी द्विवेदी, आरती गुप्ता, प्रीति केशरी और अन्य लोग उपस्थित रहे।
आगे की राह
विभाग का लक्ष्य है कि नियमित वृद्धि परीक्षण के माध्यम से कुपोषण के मामलों को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित किया जाए। यदि यह निगरानी सतत और गंभीरता से जारी रही, तो आने वाले समय में बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के संकेतकों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।



