बिलासपुर। उसलापुर गुड्स शेड में मजदूर और व्यापारियों के लिए रेस्ट रूम टॉयलेट पीने का पानी उचित पहुंच योग्य सड़क शेल्टर और शेड जैसी बुनियादी सुविधाएं है या नहीं इसकी जांच अब कलेक्टर बिलासपुर के द्वारा बनाई हुई एक समिति करेगी।ऐसे निर्देश छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की एकल पीठ जस्टिस ए के प्रसाद की बेंच ने दिए।

समिति में जिला प्रशासन के अलावा रेलवे के अधिकारी भी होंगे इस समिति को 13 जुलाई तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है 15 जुलाई को इस मामले की आगे सुनवाई होगी।

गौरतलब है कि रेलवे कामगार मजदूर यूनियन और बिलासपुर नया माल गोदाम ट्रक मालिक संघ के द्वारा बिलासपुर गुड्स शेड को अचानक 28 मई से बंद कर सारा काम उसलापुर गुड्स शेड से करने के रेलवे के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है।

वेकेशन बेंच में हुई सुनवाई के दौरान रेलवे के अधिवक्ता के द्वारा यह कथन किया गया था कि 15 दिनों में उसलापुर में सभी सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएगी ।जिसके आधार पर सुनवाई आज तक के लिए आगे बढ़ गईथी।

आज की सुनवाई के पूर्व याचिका कर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव और मानस बाजपेई ने एक शपथ पत्र दाखिल किया और बताया कि जो स्थिति 29 मई को थी उसलापुर गुड्स शेड में लगभग वही स्थिति आज भी है। कोई भी बुनियादी सुविधाएं वहां उपलब्ध नहीं कराई गई है।

इसके विपरीत रेलवे के अधिवक्ता के द्वारा दाखिल शपथ पत्र में यह दावा किया गया कि वहां रेस्ट रूम टॉयलेट आदि सभी सुविधाएं दे दी गई है।

रेलवे के द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज के अध्ययन से यह साफ होता है कि जिस टॉयलेट और रेस्ट रूम का रेलवे जिक्र कर रही है ।वह वहां दो कमरे का एक छोटा सा मकान है जो उसलापुर गुड्स शेड से लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर है। इसके अलावा कोई भी सुविधा गुड्स शेड साइड पर नहीं दी गई है।

यहां तक की अभी भी वहां लाइट नहीं लगी है और जो पहुंच मार्ग है वह बहुत ही सकरा और बड़ी गाड़ियों के लिए खतरे से भरा है।

आज की सुनवाई में जस्टिस एके प्रसाद ने केंद्र सरकार के अधिवक्ता रमाकांत मिश्रा से यह सवाल पूछा कि आखिर सभी बुनियादी सुविधाएं पहले जुटा लेने के बाद शेड को चालू करने में आपत्ति क्या है।

सुनवाई के दौरान कलेक्टर बिलासपुर की उस पत्र का भी जिक्र हुआ जिसमें खाद की सप्लाई के लिए बिलासपुर गुडस शेड को कम से कम सितंबर माह तक जारी रखना का अनुरोध किया गया है।

सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के तथ्यों को देखकर हाईकोर्ट ने इस मामले में एक निष्पक्ष जांच करना आवश्यक समझा और कलेक्टर के द्वारा बनाई गई कमेटी से जांच के निर्देश जारी किए।