43 लाख की धोखाधड़ी : कांग्रेस विधायक को राहत, जमानत में आए जेल से बाहर
बालेश्वर साहू को जमानत, 4 दिन बाद जेल से रिहाई का रास्ता साफ

जांजगीर-चांपा…छत्तीसगढ़ की राजनीति से जुड़े एक चर्चित आपराधिक मामले में जैजैपुर से कांग्रेस विधायक बालेश्वर साहू को बड़ी कानूनी राहत मिली है। जांजगीर सत्र न्यायालय ने उन्हें 50 हजार रुपये के मुचलके पर सशर्त जमानत प्रदान कर दी है। जमानतदार प्रस्तुत किए जाने के बाद विधायक की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
विधायक बालेश्वर साहू को 10 जनवरी को सीजेएम कोर्ट के आदेश पर न्यायिक हिरासत में भेजते हुए खोखरा जिला जेल दाखिल किया गया था। इससे पहले उनकी जमानत याचिका निचली अदालत से खारिज हो चुकी थी, जिसके बाद वे जेल में थे।
क्या है पूरा मामला
मामला जांजगीर जिले के चांपा थाना क्षेत्र का है, जहां 3 अक्टूबर 2025 को एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप है कि वर्ष 2015 से 2020 के बीच बम्हनीडीह कोऑपरेटिव सोसायटी में प्रबंधक पद पर रहते हुए बालेश्वर साहू ने किसान राजकुमार शर्मा, उनकी पत्नी और मां के नाम पर फर्जी तरीके से लोन स्वीकृत कराया।
जांच में सामने आया कि तीनों के कथित फर्जी हस्ताक्षर और अंगूठा निशान लगाकर करीब 43 लाख 78 हजार रुपये की राशि अपने और अपनी पत्नी के बैंक खातों में ट्रांसफर कर ली गई। इस मामले में विक्रेता गौतम राठौर की संलिप्तता भी बताई गई है।
पुलिस ने विधायक के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और आपराधिक साजिश से जुड़ी गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज किया है।
कोर्ट में चली लंबी प्रक्रिया
विधायक बालेश्वर साहू ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पहले बिलासपुर हाईकोर्ट से अंतरिम संरक्षण प्राप्त किया था, जिसके चलते पुलिस ने बिना गिरफ्तारी किए विवेचना पूरी की। इसके बाद दो संदूक भर दस्तावेजों के साथ चालान सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। अब सत्र न्यायालय से मिली राहत के बाद उनकी रिहाई संभव हो पाई है।
राजनीतिक हलचल भी तेज
पूरे मामले ने प्रदेश की राजनीति को भी गर्मा दिया था। विधायक की गिरफ्तारी के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने जेल पहुंचकर उनसे मुलाकात की थी और कार्रवाई को राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया था।




