RAS Appointment: Rajasthan Highcourt ने एक ऐतिहासिक फैसले में दो दशक से ज्यादा समय तक न्याय के इंतजार में बैठे अभ्यर्थी डॉ. देवाराम शिवरान को राहत देते हुए उन्हें आरएएस पद पर नियुक्ति देने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने न सिर्फ नियुक्ति की बात कही, बल्कि 21 अप्रैल, 2006 से बकाया वेतन, वरिष्ठता और पदोन्नति का लाभ देने के साथ-साथ राज्य सरकार पर पांच लाख रुपये का हर्जाना भी लगाया है। यह आदेश हाईकोर्ट के जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने दिया।

डॉ. देवाराम शिवरान ने साल 1999 की आरएएस भर्ती परीक्षा में 360वीं रैंक हासिल की थी, लेकिन आंखों की समस्या के आधार पर उन्हें मेडिकल अनफिट कर दिया गया।

कोर्ट ने तब उनके लिए एक पद आरक्षित रखने का आदेश दिया था। इसके बावजूद जब 2003 की भर्ती परीक्षा में उन्होंने 21वीं रैंक प्राप्त की, तब भी उन्हें उसी आधार पर नियुक्ति से वंचित कर दिया गया और राज्य सरकार ने 22वीं रैंक वाले उम्मीदवार को नियुक्ति दे दी।

याचिकाकर्ता की बार-बार की प्रार्थना के बाद मुख्यमंत्री ने एक विशेष कमेटी का गठन किया, जिसकी सिफारिश पर डॉ. शिवरान को लेखा सेवा में नियुक्ति मिली, लेकिन यह उनकी योग्यता और मेरिट के अनुरूप नहीं थी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शैलेष प्रकाश शर्मा ने कोर्ट में दलील दी कि उनका चयन निष्पक्ष प्रक्रिया के तहत हुआ था और उन्हें केवल एक चिकित्सकीय आधार पर वंचित करना संविधान के अनुच्छेद 14 के खिलाफ है।

राज्य सरकार ने अपना बचाव करते हुए तर्क दिया कि उस समय दिव्यांग आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं था और 2005 के बाद ही ऐसे आरक्षण की व्यवस्था शुरू हुई।

बावजूद इसके, कोर्ट ने माना कि जब एक योग्य उम्मीदवार को प्रतीकात्मक नियुक्ति दी गई थी और न्यायालय ने पहले ही एक पद सुरक्षित रखने का आदेश दिया था, तो अब नियुक्ति न देना गैर-कानूनी होगा।

अब राज्य सरकार को एक माह के भीतर मुख्य सचिव की उपस्थिति में डॉ. शिवरान को आरएएस पद पर नियुक्ति देनी होगी।