Raksha Bandhan Puja Thali।भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन का पावन पर्व देशभर में बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

Raksha Bandhan Puja Thali।इस खास अवसर पर बहनें अपने भाई की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए उनकी कलाई पर रक्षासूत्र बांधती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रक्षाबंधन की पूजा को विधि-विधान से संपन्न करने के लिए पूजा की थाली का सही तरीके से सजा होना अत्यंत आवश्यक माना जाता है।

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सही नियम और पवित्रता के साथ तैयार की गई थाली न केवल पूजा को पूर्ण बनाती है, बल्कि भाई के जीवन में सकारात्मकता और सफलता भी लाती है।

रोली, चंदन और अखंडित अक्षत से शुरू होती है पूजा।Raksha Bandhan Puja Thali

रक्षाबंधन की पूजा की थाली में रोली, चंदन और अक्षत यानी साबुत चावल का होना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। राखी बांधने की प्रक्रिया की शुरुआत भाई के माथे पर रोली और चंदन का तिलक लगाने से होती है। माथे पर लगाया गया यह तिलक भाई के जीवन में निरंतर उन्नति, शांति और अपार खुशियां लेकर आता है। इसके साथ ही तिलक पर बिना टूटे हुए चावल यानी अक्षत लगाए जाते हैं। शास्त्रों में अक्षत को अखंडता और पूर्णता का प्रतीक माना गया है। बिना तिलक और अक्षत के राखी बांधने का संकल्प अधूरा माना जाता है, इसलिए थाली सजाते समय इन सामग्रियों को सबसे पहले और सही स्थान पर रखा जाता है।

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जलते दीपक की आरती और मिठास घोलती मिठाई

पूजा की थाली में एक प्रज्वलित दीपक रखना भी अनिवार्य परंपरा है। भाई का तिलक करने के बाद जलते हुए दीपक से उनकी आरती उतारी जाती है।

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मान्यता है कि आरती की लौ आसपास की सभी नकारात्मक शक्तियों और बुराइयों को दूर करती है, जिससे भाई की हर विपत्ति से रक्षा होती है और घर में सुख-शांति का वातावरण बनता है। आरती के बाद भाई का मुंह मीठा कराने के लिए थाली में ताजी और शुद्ध मिठाई रखी जाती है। भाई को मिठाई खिलाने की यह मधुर रस्म दोनों के बीच स्नेह और मिठास को और गहरा करती है।

रक्षासूत्र का संकल्प और विधान से संपन्न होती पूजा

थाली का सबसे मुख्य और पवित्र हिस्सा रक्षासूत्र यानी राखी होती है। जब थाली में रोली, अक्षत, दीपक और मिठाई व्यवस्थित तरीके से रख दी जाती है, तब पूजा का विधान शुरू होता है। सबसे पहले भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाया जाता है, फिर माथे पर तिलक लगाकर अक्षत चढ़ाया जाता है। इसके पश्चात दीपक से आरती उतारने के बाद भाई की दाहिनी कलाई पर सुंदर और पवित्र रक्षासूत्र बांधा जाता है।

अंत में मिठाई खिलाकर पूजा संपन्न की जाती है। सही नियमों का पालन करते हुए सजाई गई पूजा थाली से त्योहार का आनंद कई गुना बढ़ जाता है और यह पावन पर्व भाई-बहन के रिश्ते को और भी अटूट बना देता है।