दिल्ली।इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की प्रक्रिया में अक्सर लोग जल्दबाजी या अधूरी जानकारी के कारण गलत फॉर्म का चयन कर लेते हैं।

कई बार ITR-1 या ITR-2 दाखिल करने के बाद ध्यान आता है कि एफएंडओ (F&O), इंट्राडे ट्रेडिंग, कैपिटल गेन्स या फ्रीलांसिंग से भी आय या नुकसान हुआ था, जिसके लिए ITR-3 या ITR-4 की आवश्यकता होती है।

नॉन-ऑडिट मामलों के लिए 31 अगस्त की समयसीमा बेहद नजदीक है, ऐसे में अपनी गलती को सही समय पर सुधारना बहुत जरूरी है।

अनवेरिफाइड ITR में गलती सुधारने का तरीका

यदि आपने अपना रिटर्न ई-फाइल तो कर दिया है, लेकिन अभी तक उसे ई-वेरिफाई (e-Verify) नहीं किया है, तो प्रक्रिया काफी आसान है:

  • ‘Discard’ विकल्प का उपयोग करें: इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर अनवेरिफाइड रिटर्न के लिए ‘Discard’ का विकल्प चुनें।
  • नया रिटर्न दाखिल करें: पुराना रिटर्न रद्द होने के बाद आप 31 अगस्त से पहले सही फॉर्म (जैसे ITR-3 या ITR-4) चुनकर नया ओरिजिनल रिटर्न फाइल कर सकते हैं।

वेरिफाइड ITR में संशोधन कैसे करें?

यदि आप अपने रिटर्न का ई-वेरिफिकेशन पूरा कर चुके हैं, तो पोर्टल पर नया ओरिजिनल रिटर्न जमा नहीं किया जा सकता।

  • धारा 139(5) का सहारा लें: वेरिफाई हो चुके रिटर्न की गलतियों को ठीक करने के लिए रिवाइज्ड रिटर्न (Revised Return) दाखिल करना होता है।
  • धारा 139(5) के तहत करदाता प्रासंगिक असेसमेंट ईयर की 31 दिसंबर (या असेसमेंट पूरा होने से पहले) तक अपना संशोधित रिटर्न जमा कर सकते हैं।

31 अगस्त से पहले सुधार करने के मुख्य लाभ

  • ट्रेडिंग लॉस कैरी फॉरवर्ड: एफएंडओ (F&O) या शेयर बाजार के इंट्राडे नुकसान (Business Loss/Speculative Loss) को भविष्य के लाभ के साथ सेट-ऑफ करने के लिए नियत तिथि से पहले सही ITR दर्ज करना अनिवार्य है।
  • ओल्ड टैक्स रिजीम का चयन: व्यावसायिक आय वाले करदाताओं को पुरानी कर व्यवस्था (Old Tax Regime) चुनने के लिए समय रहते Form 10-IEA दाखिल करना होता है।
  • नोटिस से बचाव: सही समय पर सुधार करने से धारा 139(9) के तहत ‘डिफेक्टिव रिटर्न’ का नोटिस मिलने, पेनल्टी लगने और रिफंड में देरी का जोखिम खत्म हो जाता है।

करदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे सबसे पहले ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर अपने रिटर्न का स्टेटस जांचें और आवश्यकता पड़ने पर किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) या टैक्स विशेषज्ञ से परामर्श लें।