private schools fee regulation/दिल्ली: दिल्ली के निजी स्कूलों में फीस बढ़ोतरी और उसके विनियमन (Regulation) को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर देश की राजधानी की सबसे बड़ी अदालत की दहलीज पर पहुंच गया है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर उस याचिका पर जवाब मांगा है, जिसमें स्कूलों ने ‘स्कूल लेवल फीस रेगुलेशन कमेटी’ (SLFRC) के गठन और नए फीस रेगुलेशन कानून को चुनौती दी है। मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार से अपना पक्ष रखने को कहा है।private schools fee regulation

क्या है स्कूलों की मुख्य आपत्ति?
निजी स्कूलों का प्रतिनिधित्व करने वाली ‘एक्शन कमेटी ऑफ अनएडेड रिकग्नाइज्ड प्राइवेट स्कूल्स’ ने ‘दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2025’ को अदालत में चुनौती दी है। स्कूलों का तर्क है कि यह नया कानून पूरी तरह से “दुर्भावनापूर्ण, पक्षपातपूर्ण और मनमाना” है। स्कूलों का कहना है कि शिक्षा निदेशालय (DoE) द्वारा 30 जून को जारी किया गया नया सर्कुलर उन पुराने आदेशों जैसा ही है, जिन पर हाईकोर्ट ने पहले ही रोक लगा दी थी। इस सर्कुलर के तहत स्कूलों को अनिवार्य रूप से एक कमेटी (SLFRC) बनानी है और अगले तीन वर्षों (2026-27 सहित) के लिए फीस बढ़ाने का प्रस्ताव देना है।

अदालत की सख्त टिप्पणी: ‘अगर सरकार कार्रवाई करे, तो हमें बताएं’private schools fee regulation
सुनवाई के दौरान स्कूलों के वकीलों ने आशंका जताई कि यदि वे इस कमेटी का गठन नहीं करते हैं, तो सरकार उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई कर सकती है। इस पर हाईकोर्ट ने राहत देते हुए कहा कि मामले की अगली मुख्य सुनवाई 20 जुलाई को तय है। अदालत ने स्पष्ट किया, “अगर सरकार इस बीच कोई जल्दबाजी में या प्रतिकूल कार्रवाई करती है, तो याचिकाकर्ता दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। तब तक 20 जुलाई का इंतजार करें।”

क्या है SLFRC और क्यों है इस पर तकरार?private schools fee regulation
दिल्ली सरकार के नए नियमों के अनुसार, हर निजी स्कूल को एक ‘स्कूल लेवल फीस रेगुलेशन कमेटी’ बनानी होगी। इस कमेटी की संरचना इस प्रकार होगी:

  • स्कूल प्रबंधन के प्रतिनिधि और प्रिंसिपल।

  • तीन शिक्षक और पांच अभिभावक।

  • शिक्षा निदेशालय (DoE) का एक नामित सदस्य।

सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था से फीस तय करने की प्रक्रिया पारदर्शी होगी और स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगेगी। कमेटी स्कूल द्वारा भेजे गए फीस वृद्धि के प्रस्तावों की जांच करेगी और 30 दिनों के भीतर अपना निर्णय सुनाएगी। दूसरी ओर, स्कूलों का मानना है कि यह उनके प्रबंधन के अधिकारों में सरकार का सीधा हस्तक्षेप है।

कानूनी दांवपेंच और पिछला घटनाक्रम/private schools fee regulation
दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने अदालत में दलील दी कि पिछले आदेशों में कोर्ट ने कमेटियां बनाने की कानूनी बाध्यता पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई थी। हालांकि, रिकॉर्ड बताते हैं कि 28 फरवरी को हाईकोर्ट ने सरकार के उस नोटिफिकेशन पर अंतरिम रोक लगा दी थी, जिसमें शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नई फीस व्यवस्था लागू करने की बात कही गई थी। कोर्ट ने तब कहा था कि स्कूल फिलहाल वही फीस ले सकेंगे जो उन्होंने पिछले सत्र में ली थी।