Pralhad Joshi: केंद्रीय कैबिनेट मंत्री प्रहलाद जोशी BJP के एक वरिष्ठ और अनुभवी नेता हैं, जो वर्तमान में कर्नाटक के धारवाड़ संसदीय क्षेत्र से लगातार पांचवीं बार लोकसभा सांसद हैं.

आज नीट विवाद को लेकर जंतर मंतर पर चल रहे प्रोटेस्ट के बीच धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर प्रहलाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है. वे वर्तमान में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का पद भी संभाल रहे हैं.

प्रहलाद जोशी का राजनीतिक सफर

  • हुबली तिरंगा आंदोलन से पहचान: प्रहलाद जोशी का जन्म 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के बीजापुर में हुआ था. वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कैडर से जुड़े रहे हैं और अपनी मजबूत संगठनात्मक क्षमता के लिए जाने जाते हैं. 1990 के दशक की शुरुआत में हुबली के ईदगाह मैदान में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के आंदोलन का नेतृत्व करके वे राष्ट्रीय राजनीति और कर्नाटक में चर्चा में आए.
  • लगातार 5 बार सांसद: प्रहलाद जोशी ने पहली बार 2004 में धारवाड़ लोकसभा सीट से जीत दर्ज की. इसके बाद वे 2009, 2014, 2019 और 2024 के आम चुनावों में लगातार जीत हासिल कर चुके हैं. वे 2012 से 2016 तक कर्नाटक बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं.
  • प्रहलाद जोशी के पास रहे प्रमुख मंत्रालय: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दोनों कार्यकाल (Modi 2.0 और Modi 3.0) में प्रहलाद जोशी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आ रहे हैं. पहले कार्यकाल के दौरान केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री, कोयला मंत्री और खान मंत्री रहे, जबकि मौजूदा समय में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री रहते हुए उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिला है.

प्रहलाद जोशी के सामने शिक्षा मंत्रालय की 3 बड़ी चुनौतियां

शिक्षा मंत्रालय का प्रभार ऐसे समय में मिला है जब देश की परीक्षा प्रणाली विश्वसनीयता के गंभीर संकट से गुजर रही है:

परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और NTA पुनर्गठन: NEET-UG और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोपों के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) का पुनर्गठन करना और छात्रों का भरोसा बहाल करना.

छात्र आंदोलनों को शांत करना: जंतर-मंतर पर जारी छात्र प्रदर्शनों को संवाद के माध्यम से हल करना और कड़े एंटी-पेपर लीक कानूनों को लागू करना.

CBT मॉडल लागू करना: भविष्य की सभी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं को तकनीकी रूप से सुरक्षित कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) मॉडल पर स्थानांतरित करना.