बलरामपुर (पृथ्वी लाल केशरी)… सरकारी धन से गांवों में जल संरक्षण के लिए बनाए गए चेकडैम ही निर्माण संबंधी अनियमितताओं की जांच में सवालों के घेरे में आ गए हैं। जनपद पंचायत राजपुर में 17 चेकडैम निर्माण कार्यों में तकनीकी खामियां और अधिक मूल्यांकन सामने आने के करीब 10 महीने बाद जिला प्रशासन ने कार्रवाई की है। एक तकनीकी सहायक की संविदा सेवा समाप्त कर दी गई है, जबकि तीन तकनीकी सहायकों से कुल 9.13 लाख रुपये की वसूली के निर्देश दिए गए हैं। जांच के दायरे में आए सभी 17 निर्माण कार्यों का भुगतान भी रोक दिया गया है। पर्यवेक्षण में लापरवाही को लेकर चार वरिष्ठ अधिकारियों से जवाब मांगा गया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य स्तरीय मुख्य कार्यालय के निर्देश पर मुख्य तकनीकी परीक्षण (सतर्कता) से 17 चेकडैम निर्माण कार्यों की जांच कराई गई थी। जांच प्रतिवेदन में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए गए। कंक्रीट की गुणवत्ता और उप-संरचनाओं के निर्माण में तकनीकी कमियां पाई गईं। यहां तक कि कंक्रीट की सतह पर प्लास्टर किए जाने का उल्लेख भी जांच रिपोर्ट में किया गया है। इसके अलावा निर्माण कार्यों का अधिक मूल्यांकन किए जाने की बात सामने आई। जांच निष्कर्षों के आधार पर अब जिम्मेदारों पर कार्रवाई की गई है।

एक की संविदा खत्म, दो पर अर्थदंड

अनियमितताओं के आधार पर जनपद पंचायत राजपुर में पदस्थ तकनीकी सहायक रोहित कुमार की संविदा सेवा 30 अक्टूबर 2026 को जारी कार्यालयीन आदेश से समाप्त कर दी गई। वहीं तकनीकी सहायक रोहित कुमार, अविनाश भारती और कृपाशंकर गुप्ता से कुल 9.13 लाख रुपये की वसूली के निर्देश दिए गए हैं। तकनीकी सहायक अविनाश भारती और कृपाशंकर गुप्ता पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 की धारा 25 के तहत एक-एक हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। दोनों को अंतिम चेतावनी पत्र जारी किया गया है।

17 चेकडैम का भुगतान अटका

जांच में शामिल सभी 17 चेकडैम निर्माण कार्यों का भुगतान रोकने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें 12 निर्माण कार्य ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग बलरामपुर और पांच कार्य जनपद पंचायत राजपुर के हैं। यानी अनियमितताओं का दायरा केवल जनपद पंचायत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग के कार्य भी जांच की जद में आए हैं।

पर्यवेक्षण करने वाले अधिकारियों से भी जवाब तलब

निर्माण कार्यों में सामने आई तकनीकी खामियों और अधिक मूल्यांकन के मामले में जिम्मेदारी केवल तकनीकी सहायकों तक सीमित नहीं रखी गई है। पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी तय करते हुए ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग बलरामपुर के कार्यपालन अभियंता सच्चिदानंद कांत और उप संभाग राजपुर के अनुविभागीय अधिकारी जानूराम सोनवानी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इसके अलावा जनपद पंचायत राजपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संजय दुबे और कार्यक्रम अधिकारी मानसाय सिदार से भी जवाब मांगा गया है।

करीब 10 महीने तक लंबित रहे इस मामले में अब हुई कार्रवाई ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, मूल्यांकन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खास बात यह है कि 17 चेकडैम कार्यों में गड़बड़ियां सामने आने के बाद भुगतान रोकने और वसूली के निर्देश तो जारी हो गए हैं, लेकिन अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर कहां तक पहुंचती है।