बलरामपुर (पृथ्वी लाल केशरी)…केंद्र से लेकर राज्य तक भाजपा की सरकार है, लेकिन सरकारी आयोजनों में भाजपा के ही निर्वाचित और मनोनीत जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित नहीं किए जाने का मामला अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त जारी होने के अवसर पर 30 अक्टूबर को बलरामपुर में आयोजित पीएम किसान उत्सव दिवस कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आमंत्रण नहीं मिलने से नाराजगी सामने आई। जनपद पंचायत बलरामपुर की उपाध्यक्ष बबली देवी सोनवानी ने कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया। नगर पालिका उपाध्यक्ष दिलीप सोनी, पार्षदों, भाजपा नेता जयप्रकाश संबल समेत अन्य नेताओं ने भी कृषि विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए।

नाराज जनप्रतिनिधियों ने कृषि विभाग के उप संचालक पर उन्हें नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि किसान उत्सव दिवस का उद्देश्य किसानों को केंद्र सरकार की योजनाओं से जोड़ना और किसान सम्मान निधि की जानकारी देना है। ऐसे महत्वपूर्ण आयोजन में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को ही आमंत्रित नहीं करना समझ से परे है। जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि कृषि विभाग के इस रवैये से सरकार की छवि धूमिल हो रही है।

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 अक्टूबर को गुजरात के बनासकांठा से पीएम किसान सम्मान निधि की 24वीं किस्त जारी की। इसी अवसर पर देशभर में पीएम किसान उत्सव दिवस मनाया गया। बलरामपुर जिला मुख्यालय में सुबह 9 बजे से ऑडिटोरियम भवन में मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसमें कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम और सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज को मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होना था। प्रतापपुर विधायक शकुंतला पोर्ते और सामरी विधायक उद्धेश्वरी पैकरा को कार्यक्रम की अध्यक्षता करनी थी। जिला मुख्यालय के अलावा विकासखंड स्तर पर भी आयोजन किए गए। मुख्य कार्यक्रम का सीधा प्रसारण वेबकास्ट के जरिए होना था।

जनप्रतिनिधियों का कहना था कि वे रोजाना किसानों और आम लोगों के बीच रहते हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इसके बावजूद नगर पालिका क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित नहीं करना उनकी उपेक्षा है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का प्रचार-प्रसार हो या किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का काम, दोनों के लिए विभाग और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय जरूरी है। ऐसे आयोजनों में सभी संबंधित जनप्रतिनिधियों की सहभागिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने आयोजन से जुड़े अधिकारियों से भविष्य में ऐसी स्थिति नहीं बनने और जनप्रतिनिधियों को सम्मानपूर्वक आमंत्रित करने की अपेक्षा जताई।

भाजपा जिलाध्यक्ष ने नहीं उठाया फोन

मामले में भाजपा जिला अध्यक्ष ओमप्रकाश जायसवाल का पक्ष जानने के लिए उनसे फोन पर संपर्क किया गया। उनसे यह जानने का प्रयास किया गया कि पार्टी के निर्वाचित और मनोनीत जनप्रतिनिधियों की विभागीय अधिकारियों द्वारा कथित उपेक्षा किए जाने पर उनका क्या रुख है। हालांकि, उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया और न ही कॉल बैक किया। लिहाजा उनका पक्ष नहीं मिल सका।

अपने ही जनप्रतिनिधियों की नाराजगी 

किसान उत्सव कार्यक्रम के बाद बलरामपुर के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इस पूरे घटनाक्रम की चर्चा होने लगी है। सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों की नाराजगी और कार्यक्रम के बहिष्कार ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक हलकों में इस पर चुटकी भी ली जा रही है कि जब केंद्र और राज्य दोनों जगह अपनी सरकार है, तब अपने ही जनप्रतिनिधियों को सरकारी कार्यक्रम में आमंत्रण के लिए तरसना पड़ रहा है। फिलहाल निगाहें कृषि विभाग के अधिकारियों के जवाब और भाजपा संगठन के रुख पर टिकी हैं।