रात जागा पाखी उवाच ; सुनाई देता है डिजिटल क्रांति का शंखनाद

“रात जागा पाखी उवाच” यह प्रख्यात् लेखिका सरला शर्मा की सर्वप्रिय प्रकाशन रायपुर -दिल्ली से प्रकाशित सद्य: प्रकाशित गद्य सर्जना है। जो सोशल मीडिया फेस बुक में उनकीपोस्टों का संकलन है। जिसमें लेखिका केसार्थक विचार हैं , चिंतन हैं, अभिमत हैं, दृष्टिकोण हैं , दर्शन हैं ,प्रसंग हैं, संदर्भ हैं हैं। जिसमें ललित निबंध जैसा लालित्य है। काव्य जैसा माधुर्य है , सौंदर्य है , सरसता है ,भावप्रवणता है। भाषा लेखिका के नाम के अनुरूप सरल है ,सहज है, प्रवाहमयी है।
रात जागा पाखी उवाच के रुप में डिजिटल क्रांति का शंखनाद सुनाई देता है ।इस कृति का शीर्षक सहसा चौंकानेवाला है। बांग्ला भाषा में “रात जागा पाखी” का शाब्दिक अर्थ होता है, रात में जागनेवालापक्षी ।रात में जागनेवाले निशाचर पक्षियों मेंसबसे प्रमुख और प्रसिद्ध है उलूक (Owl)। इसके अतिरिक्त ” रात जागा पाखी” का उपयोग बांग्ला साहित्य, गीतों और बोलचाल की भाषा में रूपक
(Metaphor) के रूप में भी किया जाता है। इसका अभिप्राय होता है ऐसा व्यक्ति जो किसी कारणवश रात भर सो नहीं पाता जैसे कोई रचनाकार, कलाकार या कोई प्रेमी या चिंता में डूबा हुआ शख़्स।
संस्कृत व्याकरण में ‘ उवाच ‘ का अर्थ होता है ‘ बोला ‘ या ‘ कहा ‘। यह ‘ वच्’ (बोलना) धातु का भूतकालिक रूप है।
धार्मिक ग्रंथों यथा श्रीमद्भगवद्गीता में इसका प्रयोग संवाद ( Conversation) शुरू करने के लिए किया जाता है। अब “रात जागा पाखी उवाच” का अर्थ हुआ ” रात में जागनेवाले पक्षी ( उलूक) ने कहा।”
हिंदी गद्य के क्षेत्र में सरला शर्मा की यह अनूठी , अनोखी साहित्यिक कृति है। जिसमें ललित निबंध , रेखाचित्र , रिपोर्ताज, संस्मरण आदि विधाओं का आस्वाद मिलेगा। आकर्षक , रोचक, विचारोत्तेजक ऐसा कि एक बार शुरू करेंगे तो बिना समाप्त किए नहीं मानेंगे।
डॉ देवधर महंत, बिलासपुर






