LIVE UPDATE
Bilaspur

बिरला ओपन माइंड्स का ‘ओपन’ फर्जीवाड़ा – अफसरों का ‘माइंड चोक’ या मिलीभगत?

जांच के नाम पर खानापूर्ति, शिक्षा विभाग की चुप्पी पर सीधे सवाल

बिलासपुर…एक निजी स्कूल से उठी गड़बड़ी अब एक संस्थान की सीमा पार कर चुकी है। मामला सीधा शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर खड़ा है। दस्तावेजों और दावों के बीच जो अंतर सामने आ रहा है, वह संकेत नहीं, चेतावनी है—या तो सिस्टम सो रहा है या फिर किसी को जगने नहीं दिया जा रहा।

कागजों का खेल या सच्चाई से दूरी?

पूरे विवाद की जड़ में है स्कूल को मिला अनापत्ति प्रमाण पत्र और सीबीएसई पोर्टल पर दर्ज जानकारी। यही वह बिंदु है जहां सच्चाई साफ हो सकती थी, लेकिन यहीं सबसे ज्यादा धुंध है। भौतिक सत्यापन अब तक नहीं हुआ। रिकॉर्ड का सीधा मिलान टलता जा रहा है। सवाल उठता है—क्या जांच शुरू होने से पहले ही उसकी दिशा तय कर दी गई है?

खामोशी में छुपा दबाव या समझौता?

स्थानीय शिक्षा विभाग की भूमिका अब सवालों के घेरे में है। विसंगतियों की चर्चा है, लेकिन कार्रवाई का कोई ठोस संकेत नहीं। नोटिस जारी नहीं होता, अभिभावकों को सच नहीं बताया जाता, और जांच की समयसीमा धुंधली रखी जाती है। यह सामान्य लापरवाही नहीं दिखती। यह वह चुप्पी है, जो अक्सर दबाव या किसी अदृश्य समझौते से पैदा होती है।

अभिभावकों के भरोसे के साथ खेल

सबसे ज्यादा चोट उन अभिभावकों पर पड़ती है, जो अपने बच्चों के भविष्य के लिए स्कूल पर भरोसा करते हैं। अगर दस्तावेजों में गड़बड़ी है और सिस्टम उसे छुपा रहा है, तो यह सिर्फ प्रशासनिक चूक नहीं—यह सीधे भरोसे के साथ धोखा है। यहां सवाल फीस या सुविधा का नहीं, भविष्य की नींव का है।

स्थानीय स्तर पर ठहराव, मामला ऊपर की ओर

जब निचले स्तर पर कार्रवाई रुकती है, तो फाइल खुद रास्ता तलाशती है। अब यह मामला जिला कलेक्टर और राज्य स्तर तक पहुंचने की दिशा में बढ़ रहा है। ऐसे मामलों में अपेक्षा स्पष्ट होती है—दस्तावेजों का जमीन पर सत्यापन हो, रिकॉर्ड का मिलान हो, और गड़बड़ी सामने आए तो कार्रवाई भी दिखे, सिर्फ फाइलों में नहीं।

सिस्टम की असली तस्वीर क्या है?

यह पूरा घटनाक्रम एक असहज सवाल सामने रखता है। क्या शिक्षा विभाग प्रभावशाली संचालकों के सामने झुक रहा है, या फिर एक ऐसा तंत्र सक्रिय है जहां नियम कागजों तक सीमित रहते हैं और जमीन पर उनका अर्थ बदल जाता है?

अंतिम सवाल अभी बाकी है

यह मामला अब जांच से ज्यादा एक परीक्षा बन चुका है—शिक्षा व्यवस्था की परीक्षा। तय होना है कि पारदर्शिता कागजों में है या कार्रवाई में। बिलासपुर इस जवाब का इंतजार कर रहा है, और हर बीतता दिन इस खामोशी को और भारी बना रहा है।

Bhaskar Mishra

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 16 साल का अनुभव।विभिन्न माध्यमों से पत्रकारिता के क्षेत्र मे काम करने का अवसर मिला।यह प्रयोग अब भी जारी है।कॉलेज लाइफ के दौरान से पत्रकारिता से गहरा जुड़ाव हुआ।इसी दौरान दैनिक समय से जुडने का अवसर मिला।कहानी,कविता में विशेष दिलचस्पी ने पहले तो अधकचरा पत्रकार बनाया बाद में प्रदेश के वरिष्ठ और प्रणम्य लोगों के मार्गदर्शन में संपूर्ण पत्रकारिता की शिक्षा मिली। बिलासपुर में डिग्री लेने के दौरान दैनिक भास्कर से जु़ड़ा।2005-08 मे दैनिक हरिभूमि में उप संपादकीय कार्य किया।टूडे न्यूज,देशबन्धु और नवभारत के लिए रिपोर्टिंग की।2008- 11 के बीच ईटीवी हैदराबाद में संपादकीय कार्य को अंजाम दिया।भाग दौड़ के दौरान अन्य चैनलों से भी जुडने का अवसर मिला।2011-13 मे बिलासपुर के स्थानीय चैनल ग्रैण्ड न्यूज में संपादन का कार्य किया।2013 से 15 तक राष्ट्रीय न्यूज एक्सप्रेस चैनल में बिलासपुर संभाग व्यूरो चीफ के जिम्मेदारियों को निभाया। 1998-2000 के बीच आकाशवाणी में एनाउँसर-कम-कम्पियर का काम किया।वर्तमान में www.cgwall.com वेबपोर्टल में संपादकीय कार्य कर रहा हूं।
Back to top button
close