रायपुर।छत्तीसगढ़ के सरकारी हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में शिक्षकों की कमी के कारण प्रभावित हो रही पढ़ाई को सुचारु बनाने के लिए लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने नई व्यवस्था के तहत वैकल्पिक शिक्षण की जिम्मेदारी सौंपने का निर्देश दिया है।

इसके अनुसार, जिन स्कूलों में किसी विषय के व्याख्याता का पद रिक्त है, वहां उपलब्ध व्याख्याताओं की शैक्षणिक योग्यता और स्नातक स्तर पर पढ़े गए विषयों के आधार पर उन्हें अतिरिक्त कक्षाएं लेने की जिम्मेदारी दी जा सकेगी।

इससे गणित, भौतिकी, रसायन शास्त्र, जीव विज्ञान सहित कला संकाय के विषयों की पढ़ाई जारी रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

डीपीआई ने इस संबंध में सभी संभागों के संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर व्यवस्था का तत्काल और कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।

बताया गया है कि स्कूल शिक्षा मंत्री के निर्देश के बाद यह कदम उठाया गया है। इसका उद्देश्य विषयवार व्याख्याताओं के रिक्त पदों के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई में आने वाली बाधाओं को कम करना है।

अब तक सरकारी स्कूलों में व्याख्याताओं को मुख्य रूप से उनकी स्नातकोत्तर (पीजी) डिग्री के विषय के अनुसार पढ़ाने की जिम्मेदारी दी जाती रही है।

उदाहरण के लिए, रसायन शास्त्र में पीजी करने वाले व्याख्याता को सामान्यतः उसी विषय की कक्षाएं सौंपी जाती हैं। लेकिन किसी स्कूल में दूसरे विज्ञान विषय के शिक्षक का पद खाली होने पर पढ़ाई प्रभावित होती है।

नई व्यवस्था में उपलब्ध शिक्षकों की शैक्षणिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त विषयों की कक्षाएं आवंटित की जा सकेंगी।

विज्ञान संकाय में गणित या भौतिकी के व्याख्याता का पद रिक्त होने पर संबंधित शिक्षक की बीएससी में पढ़े गए विषयों के आधार पर कक्षाएं आवंटित की जा सकेंगी।

इसी तरह रसायन शास्त्र या जीव विज्ञान के व्याख्याता का पद खाली होने पर दूसरे विषय के उपलब्ध शिक्षक को उसकी शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप अतिरिक्त कक्षाएं लेने की जिम्मेदारी दी जा सकेगी। इस व्यवस्था में शिक्षक की विषयगत पृष्ठभूमि को ध्यान में रखना जरूरी होगा।

कला संकाय के विषयों में भी इसी तरह वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। राजनीति विज्ञान, इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र और अन्य मानविकी विषयों के व्याख्याता पद रिक्त होने पर संबंधित शिक्षकों की बीए की अंकसूची और पढ़े गए विषयों के आधार पर कक्षाएं आवंटित की जा सकेंगी।

यानी केवल पीजी डिग्री ही नहीं, बल्कि स्नातक स्तर पर पढ़े गए विषय भी अतिरिक्त शिक्षण की जिम्मेदारी तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।

डीपीआई के इस निर्देश से उन सरकारी स्कूलों को राहत मिलने की उम्मीद है, जहां विषय विशेषज्ञों के पद खाली होने के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है।