mahakal ujjain- मंगल दोष से हैं परेशान? उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर में शिव के पसीने से हुआ था मंगल का जन्म, जानें क्या है ‘भात पूजा’ और बकरे की सवारी का रहस्य
महाकाल की नगरी में मंगलनाथ मंदिर स्थित है, जो विश्व भर में पहला मंदिर है, जिसे मंगल ग्रह का जन्मस्थान माना गया है। इस मंदिर में सूर्य की किरणें सीधे मंगल के रूप में विराजमान भगवान शिव पर पड़ती हैं, जिन्हें मंगलनाथ के रूप में पूजा जाता है। मंगलदोष निवारण के लिए लोग दूर-दूर से मंदिर में विशेष पूजा अनुष्ठान कराने के लिए आते हैं। मंगलदोष निवारण और परिवार में सुख-शांति के लिए मंदिर में भात पूजा की जाती है। इसमें पके हुए चावल को मंत्रों के उच्चारण के साथ भगवान शिव पर अर्पित किया जाता है।

mahakal ujjain-हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह की स्थिति को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। अक्सर कहा जाता है कि यदि किसी की कुंडली में मंगल भारी हो या मंगल दोष हो, तो उसे मानसिक तनाव, पारिवारिक कलह और विवाह में देरी जैसी कई चुनौतीपूर्ण समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
mahakal ujjain-इन दोषों के निवारण के लिए दुनिया भर में कई अनुष्ठान किए जाते हैं, लेकिन बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में एक ऐसा प्राचीन और सिद्ध स्थान है, जिसे साक्षात मंगल ग्रह का जन्मस्थान माना गया है। हम बात कर रहे हैं विश्व प्रसिद्ध मंगलनाथ मंदिर की, जहां दर्शन मात्र से मंगल की क्रूर दृष्टि शांत हो जाती है।
mahakal ujjain-शिप्रा नदी के तट पर स्थित मंगलनाथ मंदिर दुनिया का एकमात्र ऐसा स्थान है, जिसका संबंध सीधे खगोल विज्ञान और पौराणिक कथाओं से है। मान्यता है कि जब भगवान शिव एक अंधकासुर नामक राक्षस से युद्ध कर रहे थे, तब उनके शरीर से पसीने की एक बूंद इस स्थान पर गिरी थी।
उसी बूंद से मंगल ग्रह का जन्म हुआ और वहां एक शिवलिंग प्रकट हुआ, जिसे आज मंगलनाथ के रूप में पूजा जाता है। भौगोलिक दृष्टि से भी यह स्थान अत्यंत विशेष है क्योंकि यह मंदिर ठीक कर्क रेखा (Tropic of Cancer) पर स्थित है, जिसके कारण सूर्य की किरणें सीधे मंगल रूपी महादेव पर पड़ती हैं।
मंगलनाथ मंदिर की सबसे अनूठी परंपरा ‘भात पूजा’ है। मंगल दोष के निवारण और जीवन में सुख-शांति की कामना के लिए भक्त दूर-दूर से यहां आते हैं।
इस विशेष पूजा में पके हुए चावल (भात) को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शिवलिंग पर अर्पित किया जाता है। माना जाता है कि मंगल की प्रकृति उष्ण यानी गर्म होती है और ठंडा भात अर्पित करने से उनका प्रभाव शांत हो जाता है, जिससे भक्त को दोषों से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा, यहां नवग्रह शांति और कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए भी विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं।
mahakal ujjain-इस मंदिर की एक और चौंकाने वाली खासियत है जो इसे दुनिया के अन्य शिव मंदिरों से अलग बनाती है। आमतौर पर हर शिवालय में भगवान शिव के सामने उनके वाहन नंदी महाराज विराजमान होते हैं, लेकिन मंगलनाथ मंदिर में नंदी की जगह ‘बकरा’ स्थापित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मंगल ग्रह की सवारी बकरा है, न कि नंदी।
mahakal ujjain-यही कारण है कि यहां भगवान शिव के साथ उनके पुत्र स्वरूप मंगल की सवारी को पूजा जाता है। श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए बकरे के कान में अपनी अर्जी सुनाते हैं और फिर मंगलनाथ के दर्शन करते हैं।
महाकाल की इस नगरी में स्थित यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यहां की वास्तुकला और आध्यात्मिक वातावरण भी भक्तों को अपनी ओर खींचता है। यदि आप भी जीवन में मंगल संबंधी परेशानियों से जूझ रहे हैं, तो उज्जैन के इस पावन धाम में आकर मंगल देव की शांति और महादेव का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। यह मंदिर सदियों से अपनी दिव्यता और सटीक ज्योतिषीय गणनाओं के लिए पूरी दुनिया में विख्यात है।





