JPSC सिविल जज भर्ती मामला।सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड न्यायिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2023 के परिणाम में संशोधन को चुनौती देने वाले 35 अभ्यर्थियों की याचिकाओं को निष्प्रभावी (Infructuous) मानते हुए उनका निपटारा कर दिया है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने यह आदेश तब पारित किया, जब अदालत को सूचित किया गया कि झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) द्वारा आयोजित यह पूरी परीक्षा ही रद्द कर दी गई है।

परीक्षा रद्द हो जाने के कारण अब संशोधित मेरिट लिस्ट पर किसी भी न्यायिक निर्णय की आवश्यकता नहीं रह गई थी।

यह मामला 10 मार्च 2024 को सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के 138 पदों पर भर्ती के लिए आयोजित की गई प्रारंभिक परीक्षा से जुड़ा हुआ है।

JPSC द्वारा पूर्व में जारी मॉडल आंसर-की को लेकर विवाद खड़ा हुआ था, जिस पर झारखंड हाईकोर्ट ने तीन प्रश्नों के उत्तर गलत मानते हुए नई मेरिट लिस्ट तैयार करने का निर्देश दिया था।

मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने पर शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया था कि हाईकोर्ट स्वयं को ‘विषय विशेषज्ञ’ नहीं मान सकता और प्रश्नों का पुनः परीक्षण कराने का आदेश दिया था।

इसके बाद JPSC ने 1 जून 2026 को अंतिम उत्तर कुंजी जारी की और 5 जून 2026 को संशोधित मेरिट लिस्ट जारी की थी।

इस संशोधित मेरिट लिस्ट के कारण 35 अभ्यर्थी, जो 2 जुलाई 2024 को जारी पहली सूची में सफल घोषित हो चुके थे, चयन प्रक्रिया से बाहर हो गए थे।

इन अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर तर्क दिया था कि एक बार प्रक्रिया में आगे बढ़ चुके उम्मीदवारों को उत्तर कुंजी संशोधन के बाद इस तरह बाहर नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि, पूरी प्रारंभिक परीक्षा के ही रद्द हो जाने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि इस याचिका का अब कोई व्यावहारिक औचित्य नहीं बचा है, जिसके आधार पर मामले को बंद कर दिया गया।