बिलासपुर…जन्माष्टमी का पर्व जब घर के नन्हे बच्चे के रूप में स्वयं कान्हा बनकर आ जाएं, तो उत्सव की खुशी कई गुना बढ़ जाती है। वीआईपी कॉलोनी स्थित प्रतिष्ठित व्यवसायी सुनील छाबड़ा के निवास पर शुक्रवार को कुछ ऐसा ही मनमोहक नजारा देखने को मिला। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को छाबड़ा परिवार ने पूरे उल्लास, आस्था और पारिवारिक उमंग के साथ मनाया। नन्हे आरव छाबड़ा कृष्ण के बाल स्वरूप में सजे तो पूरा माहौल मानो गोकुल की गलियों में बदल गया।

आरव ने कृष्ण की वेशभूषा धारण कर अपनी बाल सुलभ अदाओं से हर किसी का ध्यान खींच लिया। कभी वह कान्हा की तरह अपनी छोटी सी गाड़ी दौड़ाते नजर आए, तो कभी दही-हांडी के उत्सव में शामिल होकर लोगों के बीच खुशियां बिखेरते दिखाई दिए। उनके चेहरे की मासूमियत, कृष्ण जैसा श्रृंगार और चंचल अंदाज ऐसा था कि उन्हें देखने वालों को लगा मानो भगवान श्रीकृष्ण का बाल स्वरूप ही सामने जीवंत हो उठा हो।

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जन्माष्टमी के इस खास मौके पर दही-हांडी और कृष्ण लीला का भी आयोजन हुआ। आरव ने कृष्ण के बाल स्वरूप में हांडी-मटकी और रासलीला से जुड़े प्रसंगों को अपनी मासूम अदाओं के साथ जीवंत कर दिया। परिवार के सदस्यों के साथ आसपास मौजूद लोगों ने भी इस पूरे आयोजन का जमकर आनंद लिया। नन्हे कान्हा की हर अदा पर मुस्कान बिखरती रही और कैमरों में कैद होते उनके ये पल परिवार के लिए यादगार बन गए।

 स्वागत में सजा घर, हर चेहरे पर दिखी खुशी

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छत्तीसगढ़ में जन्माष्टमी को लेकर लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिलता है। कई स्थानों पर इसे प्रेम से ‘आठवें कन्हैया’ के आगमन के पर्व के रूप में भी याद किया जाता है। बिलासपुर में भी दही-हांडी, नारियल फोड़ प्रतियोगिता और कृष्ण लीला जैसे आयोजन जगह-जगह हुए। इसी कड़ी में सुनील छाबड़ा के निवास पर आयोजित यह पारिवारिक उत्सव भी आस्था के साथ बच्चों की खुशियों का खूबसूरत संगम बन गया।

छाबड़ा परिवार में सभी प्रमुख पर्व पूरे उत्साह और पारिवारिक मेल-मिलाप के साथ मनाने की परंपरा रही है। जन्माष्टमी के अवसर पर भी परिवार के सदस्य एक साथ जुटे और नन्हे आरव के कृष्ण स्वरूप ने इस आयोजन में जैसे नई जान डाल दी। बच्चों के लिए यह केवल एक पर्व नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने का अवसर भी बना।

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सुनील बोले—बच्चों की खुशी में ही असली खुशी

इस अवसर पर सुनील छाबड़ा ने कहा कि बच्चों की खुशी और पर्व के बहाने परिवार तथा आसपास के लोगों से मिलने का अवसर मन को प्रफुल्लित कर देता है। आरव ने इस बार भगवान कृष्ण के स्वरूप में आकर केवल परिवार के सदस्यों को ही नहीं, बल्कि आसपास मौजूद लोगों को भी भीतर तक आनंदित कर दिया।

उन्होंने कहा कि जन्माष्टमी केवल भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव नहीं, बल्कि प्रेम, सौहार्द और भाईचारे का संदेश देने वाला पर्व भी है। बिलासपुर में अमन-चैन और भाईचारे का वातावरण हमेशा कायम रहे, यही उनकी कामना है। अलग-अलग रूप, रंग और विचारों के बावजूद सभी में उसी परमात्मा का अंश है। यदि हम भगवान को हर व्यक्ति में तलाशें, तो आपसी प्रेम और भाईचारे की भावना और मजबूत होगी।

छाबड़ा परिवार के इस आयोजन में नन्हे आरव ने सचमुच ‘कान्हा’ बनकर जन्माष्टमी को यादगार बना दिया। उनकी मासूम मुस्कान, बाल सुलभ शरारतें और कृष्ण स्वरूप में दिखाई दी चंचलता ने पूरे माहौल को खुशियों से भर दिया। यही तो जन्माष्टमी की खूबसूरती है—जहां आस्था के साथ बचपन मुस्कुराता है, परिवार एक साथ आता है और हर चेहरा कान्हा की खुशी में खिल उठता है।