बिलासपुर।गत दिनों शिक्षा विभाग द्वारा संयुक्त संचालक व जिला शिक्षा अधिकारियों के के नाम प्राचार्य के पदीय कार्य एवं दायित्व निर्वहन संबंधी आदेश जारी किया गया है, जिसमें प्राचार्य को आवश्यकतानुसार 2 कालखंड अध्यापन का निर्देश है, यह निर्देश पूर्व में भी प्राचार्य शैक्षिक पद होने के कारण था, आवश्यकतानुसार प्राचार्य कालखंड लेते भी है।

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा है कि वर्तमान में प्रचलित विभागीय नियम में प्राचार्य का पद प्रशासनिक पद घोषित है जो अपने परिसर के मर्ज स्कूल की पूरी व्यवस्था सम्हालते है।

साथ ही डीडीओ प्राचार्य को संकुल की पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी दिया गया है, जिसका वे समुचित निर्वहन कर रहे है। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को तो अपनाया गया है किन्तु संकुल व्यवस्था को केवल कामकाज तक क्यो सीमित रखा गया है।

संकुल प्राचार्य को पूरे संकुल का समस्त अधिकार नही दिया गया है, संकुल प्राचार्य को वेतन आहरण व वितरण, सेवा पुस्तिका संधारण की पूरी जिम्मेदारी दिए जाने का नियम है, जिसे अब तक छत्तीसगढ़ में लागू नही किया गया है।

किसी एक स्कूल में कमी पाए जाने पर उन्हें व्यवस्था बनाने व सुधारने का निर्देश जारी किया जाना था किंतु पूरे प्रदेश के लिए जारी यह निर्देश विभागीय नियम से परे जारी किया गया है जो उचित नही है।

बेहतर होता कि प्रदेश में प्राचार्य, व्याख्याता, प्रधान पाठक, शिक्षक, सहायक शिक्षकों के रिक्त पद, व्यायाम शिक्षकों के रिक्त पद, ग्रंथपाल के रिक्त पद, विज्ञान प्रयोगशाला शिक्षक के रिक्त पद, कार्यालय में लिपिक के रिक्त पदों की पूर्ति सम्बन्धित आदेश जारी होता जिससे शैक्षिक व व्यवस्थागत गुणवत्ता मे सुधार होता।

आरएमएसए की शालाओं में लिपिक और प्यून का पद स्वीकृत ही नहीं है, इस पर कार्ययोजना बनाने की आवश्यकता है, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी प्यून के हजारों पद शालाओं में रिक्त है, भर्ती नही होने से स्वच्छता प्रभावित होता है, गत 18 वर्ष से चतुर्थ श्रेणी प्यून के पद पर भर्ती ही नही हुआ है। चौकीदार का पद शालाओं में रिक्त है।

शासन स्वीकृत ड्राइंग डिजाइन के आधार पर ज्यादातर विद्यालयों में प्राचार्य, स्टाफ, शिक्षक, लिपिक कक्ष, प्रायोगिक कक्षा संचालित है, कई विद्यालयों का समुचित भवन नहीं है, जिसके कारण प्राचार्य व लिपिक/ प्राचार्य या स्टाफ/ कुछ शाला में प्रयोगशाला कक्षा में भी शिक्षक बैठते हैं, जहाँ ड्राइंग, डिजाइन अनुसार शाला भवन नही है या कक्ष कम है, इस व्यवस्था को भी सुधार किये जाने की आवश्यकता है।