live-in information : जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल सरकार ने राजस्थान विधानसभा में राजस्थान समान सिविल संहिता विधेयक, 2026 पेश किया इस विधेयक के अब विधानसभा के आगामी सत्र में चर्चा के बाद पारित होने के आसार है।

इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों में नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। हालांकि संविधान के अनुच्छेद 342 और 366 (25) के तहत आने वाले अनुसूचित जनजाति समुदायों तथा संविधान के भाग-21 के तहत संरक्षित कुछ पारंपरिक अधिकारों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।

ये खबर भी पढ़ें…
उपनिरीक्षक- दूरसंचार भर्ती परीक्षा, 2024: साक्षात्कार का परिणाम जारी
उपनिरीक्षक- दूरसंचार भर्ती परीक्षा, 2024: साक्षात्कार का परिणाम जारी
जयपुर। राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा उपनिरीक्षक- दूरसंचार भर्ती परीक्षा, 2024 के साक्षात्कार का परिणाम 19 अगस्त 2026 बुधवार को...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

जबरन शादी और गैरकानूनी तलाक पर सख्ती :live-in information

बिल में बल, धोखे या डराकर विवाह के लिए सहमति लेने पर 7 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। वहीं निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के बाहर विवाह-विच्छेद करने पर 3 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है। प्रतिबंधित नातेदारी में विवाह कराने पर छह महीने तक की साधारण कैद और 50 हजार रुपए तक जुर्माने का प्रावधान बताया गया है।

ये खबर भी पढ़ें…
Social Security Pension – सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि जुलाई से बढ़कर 1,350 रुपए, जनवरी 2027 से 1,450 रुपए प्रस्तावित
Social Security Pension – सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि जुलाई से बढ़कर 1,350 रुपए, जनवरी 2027 से 1,450 रुपए प्रस्तावित
Social Security Pension/जयपुर। राजस्थान में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनान्तर्गत सभी पात्र एवं सत्यापित पेंशनर्स को प्रतिमाह पेंशन का भुगतान सतत...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

सरकारी रिकॉर्ड में भी जरूरी होगा प्रमाणपत्र :सरकारी कर्मचारियों को अपने सेवा रिकॉर्ड में विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र देना होगा। कोई सरकारी या निजी नियोक्ता कर्मचारी की वैवाहिक स्थिति में बदलाव तब तक नहीं करेगा, जब तक संहिता के तहत जारी विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र की प्रमाणित प्रति उपलब्ध न हो।

रजिस्टर से छेड़छाड़ पर जेल : विवाह या तलाक से संबंधित सरकारी रजिस्टर को छिपाने, नष्ट करने या उसमें कपटपूर्वक बदलाव करने पर दो साल तक की जेल 10 हजार रुपए तक जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।

ये खबर भी पढ़ें…
IAS Transfer: 6 आईएएस और 7 आरएएस अफसरों के तबादले
IAS Transfer: 6 आईएएस और 7 आरएएस अफसरों के तबादले
Ias Transfer।राजस्थान में निकाय चुनाव की आचार संहिता लागू होने के बीच राज्य सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

लिव-इन रिश्ते भी आएंगे कानूनी दायरे में :live-in information

प्रस्तावित यूसीसी में लिव-इन रिलेशनशिप को भी नियमन के दायरे में रखा गया है। साथ रहने वाले वयस्क जोड़े को रजिस्ट्रार के समक्ष लिव-इन रिलेशनशिप का कथन दर्ज कराना होगा।

रिश्ता समाप्त होने पर समापन का कथन देना भी जरूरी होगा। गलत जानकारी देने या निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करने पर विधेयक के अनुसार कार्रवाई और जुर्माने का प्रावधान है।

शादी के नियम होंगे एक समान, बहुविवाह पर लगेगी रोक :

प्रस्तावित संहिता के तहत पुरुष के लिए विवाह की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष और महिला के लिए 18 वर्ष निर्धारित रहेगी। विवाह के समय किसी भी पक्ष का पहले का पति या पत्नी जीवित नहीं होना चाहिए। यानी बहुविवाह पर रोक का प्रावधान किया गया है। बाल विवाह के मामलों में संबंधित केन्द्रीय कानून के तहत कार्रवाई होगी। विवाह के बाद 60 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना जरूरी होगा। निर्धारित समय में पंजीकरण के लिए आवेदन नहीं करने पर 10 हजार रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। रजिस्ट्रार के नोटिस के बावजूद 30 दिनों में उपस्थित नहीं होने पर जुर्माना 25 हजार रुपए तक हो सकता है। हालांकि केवल पंजीकरण नहीं कराने से विवाह अवैध नहीं माना जाएगा।

बेटे-बेटी और माता-पिता को समान उत्तराधिकार :

बिना वसीयत मृत्यु होने पर संपत्ति के बंटवारे में पति या पत्नी, बेटे-बेटी और माता-पिता को समान अधिकार देने का प्रावधान है। वहीं संपत्ति हासिल करने के लिए किसी व्यक्ति की हत्या करने या उसकी साजिश रचने वाला व्यक्ति उत्तराधिकार से अयोग्य माना जाएगा।

राजस्थान के बाहर रहने वाले मूल निवासी भी दायरे में :

प्रस्तावित संहिता केवल राजस्थान में रह रहे लोगों तक सीमित नहीं होगी। राज्य के ऐसे मूल निवासी जो किसी दूसरे राज्य या देश में रह रहे हैं, उन पर भी इसके प्रावधान लागू होने की बात कही गई है। यानी कानून लागू होने के बाद विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन जैसे मामलों में नियमों का पालन करना संबंधित नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण होगा।

एक सप्ताह पहले ही कैबिनेट ने दी थी मंजूरी :

इस विधेयक के प्रारूप को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में 13 अगस्त को हुई मंत्रिमंडल बैठक में ही मंजूरी दी गई थी। उस दिन संसदीय कार्य और विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा था कि इस कानून से एक देश, एक कानून की अवधारणा पूरी होगी।