CG School/बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर के तिलक नगर स्थित स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल में उस वक्त भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब स्कूल प्रशासन ने नवमीं और ग्यारहवीं के दर्जनों विद्यार्थियों को अगली कक्षा में प्रमोट करने के महज तीन दिन बाद अचानक क्लासरूम से बाहर कर दिया।

CG School.स्कूल प्रबंधन के इस तानाशाही और यू-टर्न वाले रवैये के खिलाफ आक्रोशित पालकों ने स्कूल परिसर में ही मोर्चा खोल दिया और प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

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विवाद और हंगामे की स्थिति इतनी ज्यादा बढ़ गई कि कानून-व्यवस्था और स्थिति को नियंत्रण में लेने के लिए सिविल लाइन थाना प्रभारी (टीआई) को खुद दलबल के साथ मौके पर पहुंचना पड़ा।

इस पूरे बड़े विवाद की शुरुआत नवमीं और ग्यारहवीं कक्षा के करीब आधे विद्यार्थियों के वार्षिक परीक्षा में अनुत्तीर्ण होने से हुई थी। आंकड़ों के मुताबिक, नवमीं कक्षा के कुल 71 विद्यार्थियों में से 27 और ग्यारहवीं के 40 में से 21 छात्र फेल हो गए थे।

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इतना खराब परीक्षा परिणाम आने पर पालकों ने स्कूल प्रबंधन की शिक्षा गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए जानबूझकर बच्चों को फेल करने का गंभीर आरोप लगाया था और पहले भी प्रदर्शन किया था। तब बढ़ते जनआक्रोश को देखते हुए स्कूल प्रशासन ने बीच का रास्ता निकालते हुए सभी अनुत्तीर्ण छात्रों को अगली कक्षा में प्रमोट (उन्नत) करने का भरोसा दिया था।

परिजनों का अत्यंत गंभीर आरोप है कि स्कूल के फैसले के बाद तीन दिनों तक बच्चों को नियमित रूप से दसवीं और बारहवीं की कक्षाओं में बैठाकर बकायदा पढ़ाया गया।

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लेकिन अचानक चौथे दिन स्कूल प्रबंधन ने अपने वादे से मुकरते हुए बच्चों को क्लास से बाहर का रास्ता दिखा दिया। जब मासूम बच्चे चिलचिलाती धूप में बाहर खड़े होकर रो रहे थे, तब इसकी सूचना मिलते ही उनके माता-पिता और अभिभावक भारी संख्या में स्कूल पहुंचे और इस अमानवीय रवैये का कड़ा विरोध किया।

इस गहमागहमी के दौरान कुछ शिक्षकों द्वारा पालकों और बिलखते बच्चों के साथ बदसलूकी करने और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करने की बात भी सामने आई है, जिसने आग में घी का काम किया।

पहुंचे परिजनों के उग्र हंगामे और तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए सिविल लाइन पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। पुलिस अधिकारियों, स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों के बीच काफी जद्दोजहद और लंबी बहस के बाद आखिरकार एक बीच के समझौते पर लिखित सहमति बनी.

छात्रों को फिलहाल अस्थायी रूप से 10वीं और 12वीं की कक्षाओं में बैठने की इजाजत होगी। इनके लिए एक पृथक उपस्थिति रजिस्टर बनाया जाएगा। इस दौरान इन बच्चों को एफ-1 और एफ-2 की परीक्षाओं में शामिल होना होगा। यदि वे इन परीक्षाओं को पास कर लेते हैं, तो वे नियमित छात्र के रूप में आगे की पढ़ाई कर सकेंगे। फेल होने की स्थिति में उन्हें दोबारा 9वीं और 11वीं में लौटना होगा।