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Chhattisgarh

पेयजल संकट पर हाईकोर्ट सख्त: जल जीवन मिशन के 536 करोड़ का हिसाब देगी सरकार, पाइपलाइन बिछने के बाद भी प्यासी जनता पर अदालत ने जताई चिंता

केंद्र ने अदालत को बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए मार्च 2026 में ही राज्य सरकार को ₹536.53 करोड़ की पहली किस्त जारी की जा चुकी है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि इस राशि का उपयोग किन-किन विशिष्ट परियोजनाओं और क्षेत्रों में किया जाएगा।

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में गहराते पेयजल संकट और जल जीवन मिशन के अधूरे पड़े कार्यों को लेकर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के प्रति कड़ा रुख अपनाया है।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि केंद्र सरकार से प्राप्त ₹536.53 करोड़ की भारी-भरकम राशि का उपयोग कहां और कैसे किया जा रहा है, इसका विस्तृत ब्यौरा शपथ-पत्र (Affidavit) के माध्यम से अदालत में पेश करें। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जब बजट उपलब्ध है, तो आम जनता तक पानी पहुंचने में देरी क्यों हो रही है।

मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से महत्वपूर्ण जानकारी दी गई कि जल जीवन मिशन की समय-सीमा को अब बढ़ाकर दिसंबर 2028 तक कर दिया गया है। इसके साथ ही योजना के दूसरे चरण के लिए नई कार्यप्रणाली और अतिरिक्त फंड भी स्वीकृत किया जा चुका है।

केंद्र ने अदालत को बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए मार्च 2026 में ही राज्य सरकार को ₹536.53 करोड़ की पहली किस्त जारी की जा चुकी है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि इस राशि का उपयोग किन-किन विशिष्ट परियोजनाओं और क्षेत्रों में किया जाएगा।

यह जनहित याचिका उच्च न्यायालय द्वारा स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेकर शुरू की गई थी। दरअसल, विभिन्न रिपोर्टों में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ था कि रायगढ़, दुर्ग, बस्तर और अंबिकापुर जैसे महत्वपूर्ण जिलों में जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन बिछाने और बुनियादी ढांचा तैयार करने का काम तो कागजों पर पूरा दिख रहा है, लेकिन हकीकत में लोगों के नलों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जनता को नियमित पेयजल आपूर्ति के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, जिसे अदालत ने ‘गंभीर स्थिति’ माना है।

पिछली सुनवाई में यह बात भी सामने आई थी कि राज्य सरकार को कैबिनेट की मंजूरी मिलने तक अपने संसाधनों से काम जारी रखने के निर्देश दिए गए थे, ताकि फंड आने पर उसकी भरपाई की जा सके। अब जब केंद्र ने फंड रिलीज कर दिया है, तो हाईकोर्ट ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ‘एक्शन प्लान’ की मांग की है।

अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई 7 मई को निर्धारित की है।

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