दिल्ली: पश्चिम बंगाल में कार्यरत एक पूर्व न्यायाधीश और उनके परिवार को मिली गंभीर धमकियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया है। देश की शीर्ष अदालत ने कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया है कि वे पूर्व जज जस्टिस अनिंदिता रॉय सरस्वती और उनके परिवार को बेहतर सुरक्षा मुहैया कराने वाली याचिका पर गंभीरता से विचार करें।

जस्टिस सरस्वती वर्तमान में पश्चिम बंगाल में ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) प्रक्रिया के लिए गठित अपीलेट ट्रिब्यूनल के तौर पर एक महत्वपूर्ण न्यायिक जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

सीजेआई (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि चूंकि यह मामला एक पूर्व न्यायाधीश की सुरक्षा और उनके आधिकारिक कामकाज से जुड़ा है, इसलिए कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इस पर उचित निर्णय लेने के लिए सबसे उपयुक्त प्राधिकारी हैं।

कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता अपनी मांग लेकर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के पास जा सकते हैं और हमें विश्वास है कि वे इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जरूरी कदम उठाएंगे।

यह मामला तब प्रकाश में आया जब जस्टिस सरस्वती के बेटे और पेशे से अधिवक्ता अनन्या कांति रॉय सरस्वती ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में चौंकाने वाले आरोप लगाए गए हैं कि जस्टिस सरस्वती और उनके परिवार को उनके आधिकारिक कामकाज, विशेष रूप से वोटर लिस्ट से जुड़े न्यायिक कार्यों को प्रभावित करने के उद्देश्य से धमकियां दी जा रही हैं। याचिका के अनुसार, 22 अप्रैल 2026 को ट्रिब्यूनल जाते समय जस्टिस सरस्वती एक सड़क हादसे का शिकार हो गई थीं, जिसे पुलिस ने एक सुनियोजित साजिश माना था। इसके कुछ ही दिनों बाद, उनके घर पर हाथ से लिखा एक धमकी भरा पत्र मिला, जिसमें चेतावनी दी गई थी कि यदि SIR प्रक्रिया के दौरान उन्होंने विशेष समुदाय के लोगों के नाम वोटर लिस्ट में शामिल नहीं किए, तो उन्हें और उनके परिवार को जान से मार दिया जाएगा।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि उनके घर के बाहर लगे CCTV कैमरों की वायरिंग के साथ भी छेड़छाड़ की गई और बिधाननगर पुलिस को बार-बार सूचित करने के बावजूद उन्हें पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी गई। याचिका में मांग की गई थी कि खतरे का व्यापक आकलन कर सशस्त्र सुरक्षा प्रदान की जाए और मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या विशेष जांच दल (SIT) से कराई जाए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी न करते हुए सुरक्षा के संवेदनशील पहलू को सुलझाने की जिम्मेदारी कलकत्ता हाईकोर्ट को सौंप दी है।