Cg news।छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के सुदूर और अंदरूनी ग्रामीण इलाकों में बच्चों को उनके ही गांव में शिक्षा मुहैया कराने के लिए जिला प्रशासन द्वारा सलवा जुडूम काल में बंद हुए स्कूलों को 2021 में पुनः शुरू किया गया था.

हालांकि, अब इन्हीं पुनर्नवादिष्ट (पुनः संचालित) प्राथमिक विद्यालयों की जमीनी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. भोपालपटनम और बीजापुर ब्लॉक के चार प्राथमिक स्कूलों के ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि यहां पदस्थ शिक्षक और प्रधानाध्यापक (Headmaster) महीनों से स्कूल से नदारद रहते हैं.

ग्रामीणों के अनुसार, शिक्षक महीने में महज 1 से 2 दिन या अधिकतम 3 से 4 दिन ही औपचारिकता पूरी करने पहुंचते हैं, जिससे बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है.

सबसे गंभीर स्थिति भोपालपटनम ब्लॉक के प्राथमिक शाला बंदेपारा की सामने आई है।ग्रामीणों ने बताया कि यहां जून 2025 से पदस्थ प्रधानाध्यापिका मंजुलता रापर्ती नियमित रूप से शाला नहीं आतीं. वे केवल 15 अगस्त या 26 जनवरी जैसे राष्ट्रीय पर्वों के विशेष अवसरों पर ही स्कूल में नजर आती हैं.

प्रधानाध्यापिका की अनुपस्थिति में स्कूल का संचालन स्थानीय ‘शिक्षादूत’ विनय कुम्मा द्वारा किया जा रहा है. शिक्षादूत और वार्ड पंच नागैया ने भी शिक्षिका के नियमित न आने की पुष्टि की है.

ग्रामीणों का दावा है कि उपस्थिति रजिस्टर (Attendance Register) की जांच करने पर उसमें प्रधानाध्यापिका के हस्ताक्षर तक दर्ज नहीं पाए गए हैं.