बिलासपुर। पिता की जमीन में हिस्सेदारी से अपने भाई को बेदखल करने के लिए उसके चाचा द्वारा गोद लिए जाने का दावा करने वाले व्यक्ति को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कथित दत्तक पिता के पहले से तीन बेटे जीवित थे। ऐसे में हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 की धारा 11 के तहत बेटे को गोद लेने की अनिवार्य कानूनी शर्त पूरी नहीं होती।

जस्टिस सुषमा सावंत ने इस आधार पर दूसरी अपील को प्रारंभिक सुनवाई के स्तर पर ही खारिज कर दिया।

मामला कोंडागांव जिले के सोनाबाल गांव का है। यहां निवासी पदुम सिंह ने अपने दिवंगत जैविक भाई सोमन सिंह की दोनों पत्नियों और बच्चों के खिलाफ दीवानी मुकदमा दायर किया था। विवाद उनके पिता पुरसती के नाम दर्ज 2.45 एकड़ जमीन को लेकर था।

पदुम सिंह का दावा था कि सोमन सिंह को उनके चाचा सीताराम ने गोद ले लिया था। इसलिए सोमन सिंह का अपने जैविक पिता की संपत्ति में कोई अधिकार या हिस्सा नहीं बनता।

पदुम सिंह ने अदालत से जमीन पर अपना मालिकाना हक घोषित करने, कब्जे में हस्तक्षेप रोकने और राजस्व अभिलेखों में अपना नाम दर्ज कराने की मांग की थी। हालांकि, निचली अदालतों में उनका दावा स्वीकार नहीं किया गया।

कोंडागांव के सिविल जज द्वितीय ने 28 अक्टूबर 2010 को फैसला सुनाते हुए कहा था कि सोमन सिंह के गोद लिए जाने की प्रक्रिया कानूनी रूप से साबित नहीं हुई है।

इस आधार पर पदुम सिंह का मुकदमा खारिज कर दिया गया। इसके खिलाफ दायर अपील को अतिरिक्त जिला न्यायाधीश, कोंडागांव ने 24 जून 2016 को खारिज कर दिया। इसके बाद पदुम सिंह ने हाईकोर्ट में दूसरी अपील दायर की।

अपीलकर्ता के अधिवक्ता ने दलील दी कि दोनों निचली अदालतों ने सोमन सिंह के कथित दत्तक ग्रहण के प्रभाव और जैविक व दत्तक पिता की संपत्तियों में उनके उत्तराधिकार संबंधी अधिकारों पर उचित विचार नहीं किया।

हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम की धारा 6 और 11 का उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि वैध दत्तक ग्रहण के लिए यह साबित होना जरूरी है कि बच्चे को गोद देने वाला व्यक्ति कानूनी रूप से सक्षम था और गोद लेने वाला व्यक्ति भी निर्धारित शर्तों को पूरा करता था। इसके साथ ही बच्चे को वास्तविक रूप से गोद देने और लेने की प्रक्रिया का पालन होना भी आवश्यक है।

कोर्ट ने पाया कि निचली अदालत के रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रमाण मौजूद नहीं है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि सोमन सिंह को किस व्यक्ति ने गोद दिया था और गोद देने तथा लेने वाले व्यक्ति कानूनी रूप से सक्षम थे या नहीं। मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह था कि कथित दत्तक पिता सीताराम के पहले से तीन बेटे थे। कानून के अनुसार, किसी बेटे को गोद लेने के समय दत्तक पिता या माता का कोई हिंदू बेटा, बेटे का बेटा या बेटे के बेटे का बेटा जीवित नहीं होना चाहिए।

हाईकोर्ट ने कहा कि मामले में दत्तक ग्रहण की वैधानिक शर्तें पूरी होना साबित नहीं हुआ है। दोनों निचली अदालतों के निष्कर्षों में ऐसी कोई कानूनी त्रुटि या खामी नहीं है, जिसके आधार पर हाईकोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़े। साथ ही दूसरी अपील में कानून का कोई महत्वपूर्ण प्रश्न भी नहीं बनता।